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CRPF CoBRA
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के जंगलों में ‘सीआरपीएफ’ के कोबरा कमांडो, अब दहशतगर्दों का काल बनेंगे। सीआरपीएफ की ‘कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) इकाई के इन जांबाजों को ‘जंगल वॉरफेयर’ का खासा अनुभव हासिल है। कोबरा यूनिट ने नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों की कमर तोड़ने में बड़ी भूमिका अदा की है। अब इस यूनिट को कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगाया जाएगा। कोबरा कमांडो का पहला बैच, जिसने जम्मू-कश्मीर के जंगलों में लड़ने का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, उसे कुपवाड़ा में तैनात किया गया है। सूत्रों का कहना है कि विभिन्न चरणों में कोबरा कमांडो की संख्या बढ़ाई जा सकती है। कोबरा के बारे में कहा जाता है कि ये कमांडो ‘यूएस’ मेरिन फोर्स को टक्कर देते हैं।
आतंक रोधी अभियानों में खुद को साबित किया है
छह माह पहले कोबरा यूनिट को जम्मू-कश्मीर में भेजा गया था। कमांडो की ट्रेनिंग अब पूरी हो गई है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से ‘सीआरपीएफ’ तैनात है। वहां पर आतंकियों के खिलाफ विभिन्न ऑपरेशंस में सेना की राष्ट्रीय राइफल और पुलिस के साथ सीआरपीएफ भी रहती है। इस बल की ‘क्यूएटी’ ने आतंक रोधी अभियानों में खुद को साबित कर दिखाया है। सीआरपीएफ कमांडो, बहादुरी के कई कारनामों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। कोबरा यूनिट का गठन ‘यूएस मेरिन कमांडो फोर्स’ की तर्ज पर हुआ था। अब ये कमांडो, बहादुरी के कई कारनामों में यूएस मेरिन कमांडो से आगे निकल चुके हैं।
2015 में पहली बार नजर आए थे कोबरा कमांडो
साल 2015 में गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो राष्ट्र के सामने आए थे। कोबरा यूनिट का गठन करने से पहले यूएस मेरिन कमांडो, उनकी ट्रेनिंग, वर्किंग स्टाइल, सर्जीकल स्ट्राइक और दूसरे कई तरह के ऑपरेशन की जानकारी ली गई। इन सबके बाद ही कोबरा यूनिट स्थापित हुई थी। यह विशिष्ट कमांडो फोर्स जंगल में बिना किसी मदद के 11 दिन तक लड़ सकती है। इसी वजह से कोबरा विश्व में पहले स्थान पर है। नक्सलियों, आतंकियों से लड़ने और दूसरे बड़े ऑपरेशनों के लिए इस विशिष्ट फोर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है। हथियार, वर्दी एवं तकनीकी उपकरणों के मामले में भी ‘कोबरा’ दूसरे सभी बलों से पूरी तरह अलग है। बिना किसी मदद के लगातार डेढ़ सप्ताह तक जंगलों में लड़ते रहना इस फोर्स की खासियत है।
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