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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आईएएस केके पाठक।
– फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
बिहार की राजधानी पटना स्थित सचिवालय के विभागीय सभा कक्ष में अफसरों को गालियां देने और बिहार-बिहारियों की मां-बहन करते हुए वीडियो में दिखे-सुने भारतीय प्रशासनिक सेवा के सीनियर अधिकारी केके पाठक का 11 महीने में कुछ नहीं बिगड़ा। रही-सही कसर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनसे टकराने वाले मंत्री प्रो. चंद्रशेखर का विभाग बदलकर पूरी कर दी। अब पाठक अपने जूनियर आईएएस अफसरों से भिड़ गए हैं। मौसम विभाग की ओर से जारी भीषण शीतलहरी के पूर्वानुमान और ताजा हालत को देखते हुए जिलाधिकारियों ने आठवीं तक के सभी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में भौतिक पठन-पाठन बंद कराने का आदेश दिया था। पाठक ने डीएम के आदेश को अपनी मुखालफत माना है। शिक्षा विभाग के निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) ने बाकायदा ऐसे जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी को आदेश दिया है कि वह डीएम की बात नहीं मानें, स्कूल खोलें।
पटना के डीएम के बारे में जारी यह चिट्ठी पढ़ें
किसी राज्य में जैसे मुख्य सचिव का आदेश प्रशासनिक रूप से सर्वमान्य होता है, उसी तरह जिले का प्रशासनिक तौर पर मालिक उसका जिलाधिकारी होता है। यही व्याख्या हर जगह है। जिले में किसी भी तरह की अप्रिय वारदात का जिम्मेदार डीएम को माना जाता है। अधिकार और कर्तव्य के हिसाब से डीएम ही अबतक भीषण ठंड या भीषण गर्मी या जल-प्रलय आदि की स्थिति में स्कूलों में छुट्टी आदि को लेकर अंतिम आदेश जारी करते रहे हैं। इसी अधिकार के तहत 21 जनवरी की देर शाम पटना डीएम ने मौसम के हालत और पूर्वानुमान को देखते हुए आठवीं कक्षा तक के स्कूलों में 23 जनवरी तक अवकाश रखने का आदेश जारी किया था। इस आदेश में प्राइवेट-सरकारी स्कूल और कोचिंग संस्थान शामिल थे। अब माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव ने पटना डीएम के आदेश संख्या- 997 के तहत सरकारी विद्यालयों को बंद करने के आदेश को अवैध करार दिया है। लिखा है कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की अनुमति लिए बगैर पटना के डीएम ने यह आदेश जारी किया है। नालंदा, गया, पटना जैसे कुछ ही डीएम ने इस तरह के आदेश सार्वजनिक किए, बाकी में सोमवार को संशय की स्थिति ही रही। पटना डीएम के आदेश पर केके पाठक का आदेश भारी मानते हुए गया के डीएम ने सोमवार को अपने जिले में आठवीं तक के निजी-सरकारी विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में सुबह साढ़े 11 बजे से साढ़े तीन बजे तक खोलने का निर्देश जारी कर दिया। खास बात यह कि अब पूर्व के वर्षों से कम ठंड होने का हवाला देकर गया डीएम ने अपना आदेश बदला है।
केके पाठक का आदेश- स्कूल खोलना सुनिश्चित करें
‘अमर उजाला’ ने रविवार शाम प्रकाशित खबर में इस तरह के संकट की आशंका जताई थी। इसके साथ ही बताया था कि मंत्री को कुर्सी से हटाने में कामयाब रहे केके पाठक से डरे हुए डीएम भीषण ठंड की हालत जानकर भी छुट्टी नहीं बढ़ा पा रहे हैं। इसके कुछ घंटे बाद पटना डीएम ने जब छुट्टी घोषित की तो वह खबर अपडेट की गई। अमूमन पटना डीएम के बाद ही बाकी सारे ऐसा आदेश जारी करते हैं, लेकिन नालंदा और गया के डीएम पहले ही आदेश जारी कर चुके थे। बाकी इसलिए नहीं कर रहे थे, क्योंकि केके पाठक ने ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद सभी प्रमंडलाधिकारियों से जानना चाहा था कि मौसम के नाम पर छुट्टी देने का क्या औचित्य है? इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि उनकी अनुमति के बगैर आदेश नहीं जारी किए जाएं। लेकिन, जब रविवार देर शाम पटना डीएम ने आदेश जारी किया तो अब सोमवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इसे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के विभागीय पत्र संख्या 12 का हवाला देते हुए लिखा गया कि पटना डीएम ने उनसे इसके लिए अनुमति नहीं ली। इसलिए, जिला शिक्षा पदाधिकारी सुनिश्चित करें कि 23 जनवरी को विद्यालयों का खुलना सुनिश्चित करें। पटना डीएम के आदेश को रद्द किए जाने की जानकारी देख गया डीएम को भी तुरंत मौसम अच्छा लगने लगा और उन्होंने अपना आदेश बदल डाला।
सरकारी तो अब खुलेंगे ही, प्राइवेट भी कर सकते हैं मनमानी
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के हस्ताक्षर वाले पत्र के हवाले से पटना के सरकारी विद्यालयों का खुलना तय है। मंगलवार को तो खुलना ही होगा। हर जिले के सरकारी स्कूलों को खुलना होगा। नहीं खुलने का मतलब वहां के जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक से पुराने रिकॉर्ड के अनुसार अपशब्द भी सुन सकते हैं या कार्रवाई की जद में भी आ सकते हैं। यही देखकर गया डीएम आदेश बदल चुके हैं। मंत्री को कुर्सी से हटवाने में कामयाब रहे पाठक के आदेश प्रावइेट स्कूल और कोचिंग संस्थान पर लागू नहीं होंगे, लेकिन संभव है कि जब सरकारी स्कूल आदेश नहीं माने तो प्राइवेट वाले भी मनमानी पर उतर आएं। यह स्थिति जिलाधिकारी स्तर के आईएएस अधिकारियों के लिए बेहद विकट होगी। ऐसे में मामला तूल पकड़ सकता है और सीनियर-जूनियर की लड़ाई मंत्री-पाठक की लड़ाई की तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने पहुंच सकती है। ऐसा कुछ एक ही स्थिति में नहीं होगा, जब गया डीएम की तरह पाठक से डरकर सारे डीएम अपने आदेश को बदल दें और उन्हें ठंड अब अच्छी लगने लगे।
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