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अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे लोग।
– फोटो : अमर उजाला।
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गर्भ में बेटा है या बेटी। यह जानने की कीमत महज पांच हजार रुपये है। चौंकिए मत, यह बात सोलह आना सच है। बिचौलिए, लिंग परीक्षण के लिए बने कानून को तोड़कर इतनी ही रकम में लिंग परीक्षण करा रहे हैं। अगर बेटी है तो कई बार गर्भ में उसकी हत्या कर दी जाती है। उसकी जिंदगी खत्म करने के फेर में कई बार गर्भवती भी अपनी जान गंवा देती हैं।
आश्चर्य तो इस बात का है कि इसे रोकने की जिम्मेदारी लिए बैठा स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई तभी करता है, जब मामला तूल पकड़े या फिर कोई आकर उनके दफ्तर तक शिकायत करें। खुद से विभाग को इसकी फिक्र नहीं है, जिस वजह से न चाहते हुए भी महिलाएं लिंग जांच कराकर खुद की और पेट में पल रहे शिशु की जिंदगी गंवा दे रही।
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चलिए, चलते हैं, शहर के एक ऐसे ही अल्ट्रासाउंड सेंटर पर। यह जिला अस्पताल से ज्यादा दूर नहीं है, पतली गली में जरूर जाना होगा। ऊपरी तल पर एक दुकान में अल्ट्रासाउंड सेंटर है। बाहर कुर्सी-मेज रखे हैं, जिस पर धूल को देखकर अंदाजा भी नहीं कर सकते, कि यहां पर कोई आता जाता होगा। थोड़ी देर बाहर खड़े होने पर एक युवक आता है और फिर सीधा सवाल किससे मिलना है।
जैसे ही आप लिंग परीक्षण की इच्छा जाहिर करेंगे, आपसे मोलभाव शुरू होगा। रकम जमा करने के बाद सीधे ऊपर लेकर जाएगा और फिर लिंग परीक्षण कर बता दिया जाएगा कि पेट में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी। हालांकि, इसकी कोई रशीद नहीं मिलेगा और न ही रिपोर्ट। मौखिक बताकर भेज दिया जाता है। यह हाल शहर में है, लेकिन अगर देहात में इसी काम को कराना है, तो बेहद आसान है। वहां पर पान वाला भी आप को बता देगा कि कहां पर जाने पर लिंग परीक्षण होगा और बिचौलिए कहां मिलेंगे। इन लोगों को न तो नियम कानून का डर है और न ही कोई रोकने वाला।
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