हाईकोर्ट : नई राजस्व संहिता से तय करें लंबित मामले, हाईकोर्ट ने लंबित म्यूटेशन अर्जी मामले में दिया आदेश

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Pending cases should be decided by the new Revenue Code, High Court gave order in the pending mutation petitio

कोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लंबित म्यूटेशन अर्जी को उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम के बजाय बाद में आए कानून उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा के मुताबिक तय करने के तहसीलदार बांदा के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।

साथ ही तहसीलदार बांदा के आदेश के खिलाफ कानूनी उपबंध लागू करने को लेकर दाखिल याचिका खारिज करने के एकलपीठ के आदेश को भी रद्द कर दिया है। कहा, तहसीलदार तत्समय के कानून के तहत अर्जी तय कर ने के आदेश का पालन करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एसक्यू एच रिजवी की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश की वैधता की चुनौती में दाखिल अधिवक्ता चंद्र भान सिंह की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए दिया है।

अपीलार्थी का कहना था कि उसने जमीन के म्यूटेशन के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत तहसीलदार को अर्जी दी। खारिज करने पर कमिश्नर को अपील की। अपील मंजूर कर कमिश्नर ने तहसीलदार को नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कोई आदेश पारित न कर लंबित रखा तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने कहा, राजस्व संहिता की धारा 231 से स्पष्ट है कि संहिता लागू होने से पहले लंबित मामले तत्समय के कानून से तय होंगे। इसका पालन नहीं किया गया, जो सही नहीं है। तहसीलदार को 1950 के कानून में अर्जी तय करनी चाहिए न कि 2006 के कानून में।

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