हाईकोर्ट : विभागीय जांच में दंडित कर हुई बर्खास्तगी मनमानी व सनक भरी, पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द

[ad_1]

Dismissal after punishment in departmental inquiry is arbitrary and capricious, dismissal of police officer c

अदालत।
– फोटो : अमर उजाला।

विस्तार


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित व एक मित्र चश्मदीद की सवा चार लाख की लूट की गवाही पर बिना दोषी करार दिए आरोपी पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। साथ ही विभागीय जांच रिपोर्ट पर विभाग को नियमानुसार कार्रवाई की छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने केशव देव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

कोर्ट ने विभागीय जांच कार्यवाही में प्रक्रियात्मक दोष और बिना आरोप साबित किए बर्खास्त करने के दंड को मनमाना व सनक पूर्ण आदेश करार दिया है। साथ ही जारी कारण बताओ नोटिस, बर्खास्तगी आदेश व अपीलीय व पुनरीक्षण आदेशों को रद्द कर दिया है।

याची अधिवक्ता का कहना था कि आरोपी याची के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर चले आपराधिक केस में कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया और उसी एफआईआर के आधार पर आरोपित कर विभागीय जांच में केवल पीड़ित व मित्र की गवाही पर लूट का जिम्मेदार मानते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

 

मामले में कन्हैयालाल मिश्र ने घटना के पांच दिन बाद याची पर उसकी जेब से सवा चार लाख छीन लेने के आरोप में 17 दिसंबर 2016 को एफआईआर दर्ज कराई। वारदात के समय मित्र गोपाल शर्मा मौजूद था।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *