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आयुषी।
– फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर जिले के मोहम्मदपुर गांव में शुक्रवार को हर तरफ सन्नाटा था। घरों में चूल्हे नहीं जले। सबकी आंखें नम थीं। लोग पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधा रहे थे। मासूम कृष्णा की मां पूजा बदहवास थी। बार बार कह रही थी कि मेरी कोख उजड़ गई, अब किसके सहारे जिंदगी कटेगी।
उधर, कांती के घर में चार साल की आयुषी दादी के शव से लिपटकर रो रही थी। मौत से अंजान मासूम शव उठते ही चीख पड़ी। बोली कि दादी को मत लेकर जाओ। गांव में एक ही चर्चा थी कि ऐसी क्या गलती हो गई कि शांति के लिए हो रहे महायज्ञ में अशांति फैल गई। एक मासूम सहित तीन की जान चली गई। लोगों को पूरी जिंदगी का दर्द मिल गया।
दूसरी ओर, गांव वाले गम के समय पीड़ित परिवार को संभालने में लगे रहे। कोशिश थी कि परिवार को किसी तरह समझा कर संभाला जाए। मगर, कोशिशें काम नहीं आ रही थीं। चार साल के मासूम को खोने वाली मां पूजा बार-बार बेहोश हो जा रही थी। उसे होश में लाने के लिए पानी के छींटें मारने पड़ रहे थे।
होश में आते ही फिर कृष्णा को याद करके रोने लगती। दूसरी तरह, उसकी मां कौशल्या की लाश पड़ी थी। कभी मां तो कभी बच्चे के शव को पकड़कर पूजा दहाड़े मार मार कर रो रही थी। हृदय विदरक रुदन से हर किसी की आंख नम और गल रुंध जा रहा था।
आयुषी तो हादसे के समय अपनी दादी कांती के साथ ही थी। बताया जा रहा है कि आयुषी को बचाने के चक्कर में ही कांती की जान चली गई। नहीं तो वह कुछ दूरी पर थीं और बच सकती थीं। आयुषी सिर्फ दादी को ही याद करके रो रही है। मासूम का रोना देखकर लोग उसे टॉफी आदि देकर बहलाने की कोशिश करते नजर आए।
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