हिंदी दिवस: अंग्रेजी की अधिसूचनाओं के बीच हिंदी दिवस मनाएगा जम्मू कश्मीर, महज पठन-पाठन तक न रह जाए सीमित

[ad_1]

jammu kashmir news: Jammu Kashmir will celebrate Hindi Diwas amid English notifications

हिंदी दिवस 2023
– फोटो : istock

विस्तार


हिंदी दिवस 14 सितंबर को है। प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कुछ ही दिन में कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। सप्ताह भर तक विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं व गतिविधियां होंगी, जिसमें हिंदी का प्रसार, प्रचार और भाषा का ज्ञान दिया जाएगा। अंग्रेजी बोलने वाले भी हिंदी में बात करेंगे। सबकुछ हिंदी में होगा, लेकिन कोई भी कार्य करने की अधिसूचनाएं अंग्रेजी में जारी होंगी। यानी सालभर में विश्व हिंदी दिवस को छोड़ हिंदी दिवस के 7 दिन तक ही हिंदी का गुणगान होगा।

बाद में हिंदी विभाग का आधिकारिक काम अंग्रेजी में चलेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी विशेष दिवस पर ही हिंदी को याद किया जाएगा या हिंदी को तन, मन से अपनाया जाएगा। इसका जवाब अधिसूचनाओं की भाषा बदलने के बाद ही मिलेगा। छात्रों का हिंदी के प्रति घटना रुझान भी इसकी एक बड़ी वजह है। दाखिले की कमी से कुछ विवि या कॉलेज में हिंदी विभाग कार्यरत नहीं है।

ये विश्वविद्यालय हिंदी में जारी करते हैं अधिसूचनाएं

राहत की बात यह है कि केंद्रीय विवि जम्मू का हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग हिंदी में अधिसूचना जारी करता है, लेकिन टाइपिस्ट शिक्षक हैं। इसी तरह आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईएम जम्मू को छोड़कर अन्य संस्थानों में हिंदी में काम नहीं हो रहा।

प्रदेशभर में हालात ऐसे हैं कि जमीनी स्तर पर हिंदी भाषा में कोई काम नहीं किया जा रहा। हिंदी सिर्फ पाठन-पठन और नौकरी तक सीमित रह गई है। अंग्रेजी और उर्दू की तुलना में सरकारी कार्यालयों में हिंदी का अस्तित्व नहीं है। हैरानी की बात है कि हिंदी विभागों भी जूनियर असिस्टेंट और टाइपिस्ट भी अंग्रेजी के रखे हैं।

प्रश्न पत्र से लेकर अन्य जरूरी अधिसूचनाएं शिक्षकों को ही हिंदी में टाइप करनी पड़ रही हैं। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संचालित हिंदी विभागों की ओर से भी हिंदी से संबंधित नॉन टीचिंग के पद जारी करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा जा रहा। वहीं, जम्मू विश्वविद्यालय में केंद्रीय हिंदी निदेशालय को मंजूरी दी गई थी, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी कार्य ठंडे बस्ते में है।

हिंदी के प्रचार के लिए रक्षा मंत्री से भी हुई बातचीत

जम्मू-कश्मीर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के मंत्री व संचालक प्रो. भारत भूषण शर्मा ने कहा-संस्थानों में अंग्रेजी का माहौल है। सक्षम अधिकारियों को हिंदी में पत्र भी भेजा जाता है, तो उसका जवाब नहीं मिलता। संस्थानों में ड्राफ्टिंग करने के लिए कर्मचारी नहीं हैं। हिंदी में जमीनी स्तर पर काम करने के लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। अनुकूल वातावरण बनाना होगा।

उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से जून में हिंदी को लेकर बैठक हुई थी, उन्हें समस्या से अवगत करवाया गया। शिक्षाविद और साहित्यकार डॉ. मुक्ति शर्मा ने कहा कि हिंदी विषय में भी अंग्रेजी की तरह नॉन टीचिंग के पद निकलने चाहिए। इससे दो फायदे होंगे। पहला-युवाओं को रोजगार मिलेगा और दूसरा-हिंदी के प्रचार के लिए काम हो सकेगा। सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी पर ध्यान देने की अधिक जरूरत है। लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए काम करना होगा।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *