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केंद्रीय टीम।
– फोटो : संवाद
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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से नुकसान का आकलन करने पहुंची केंद्रीय टीम ने शुक्रवार देर शाम शिमला में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों से बैठक की तथा नुकसान की रिपोर्ट पर चर्चा की। इस दौरान केंद्रीय टीम ने माना कि आपदा प्रभावित जिलों में भारी नुकसान हुआ है। मुख्य सचिव ने राज्य के अधिकारियों से कहा कि नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट के लिए दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करते हुए तथ्य प्रस्तुत किए जाएं। आपदा से हुए नुकसान के दृष्टिगत केंद्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि से सहायता प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्तरों पर मामले को सही परिपेक्ष्य में प्रस्तुत करना अनिवार्य है। प्रदेश में बारिश के कारण हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए स्पेस बेस्ड एप्लीकेशन की उपयोगिता सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने कहा कि राहत कार्यों के दौरान ड्रोन और आपदा मित्रों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय टीम के अध्यक्ष रविनेश कुमार ने बताया कि टीम ने दो अलग-अलग समूहों में आपदा प्रभावित जिलों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव के लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार के कदमों की सराहना भी की। रविनेश कुमार और टीम के अन्य सदस्यों ने रिपोर्ट के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इस अवसर पर राहत एवं बचाव कार्यों पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र भी प्रस्तुत किया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अभिषेक त्रिवेदी, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और अंतर-मंत्रालीय टीम के सदस्य बैठक में उपस्थित थे।
प्रदेश में भूस्खलन की 5480 घटनाएं
बैठक में आपदा के दौरान विभिन्न राहत एवं बचाव कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। यह अवगत करवाया गया कि 24 जून से 14 जुलाई तक सामान्य से 147 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, 7 से 11 जुलाई तक सामान्य से 436 प्रतिशत अधिक बारिश, जबकि मानसून के दौरान अभी तक प्रदेश में भूस्खलन की 5480 घटनाएं, बादल फटने की 14 और फ्लैश फ्लड की 83 घटनाएं हुई हैं।
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