हिमाचल: राजस्व अधिकारियों को निर्धारित समय में निपटाने होंगे मामले, भू-राजस्व संशोधन अधिनियम अधिसूचित

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Revenue officers will have to settle cases within stipulated time, Governor approves Land Revenue Act.

हिमाचल प्रदेश सरकार
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश में अब राजस्व अधिकारी व्हाट्सएप, मेल और एसएमएस के माध्यम से समन की तामील कर सकेंगे। प्रदेश सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भू राजस्व संशोधन विधेयक को पारित किया था। शुक्रवार को राजपत्र में इसे प्रकाशित कर दिया गया है। अब इस अधिनियम के तहत राजस्व अधिकारियों को चार महीनों में मामलों का निपटारा करने के लिए कहा गया है। इसके अतिरिक्त भूमि की इंतकाल कार्यवाहियों की प्रक्रिया में शीघ्रता लाने के आशय से सार्वजनिक नोटिस की अवधारणा को स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।

राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपील और अन्य मामलों में देरी माफी का प्रावधान करने का प्रस्ताव भी किया गया है। इसके लिए आवेदक को सक्षम अधिकारी के समक्ष देरी के कारण स्पष्ट करने होंगे। अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए और राजस्व मामलों के निपटान में देरी के कारण लोगों को पेश आ रही कठिनाइयों और समस्याओं का समाधान करने के लिए इस कानून में बदलाव करने का सदन में प्रस्ताव किया गया। मौजूदा अधिनियम के तहत राजस्व मामलों के निपटारे के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है।

80 लाख तक की भूमि खरीद पर महिलाओं को देनी होगी चार फीसदी स्टांप ड्यूटी

वहीं,  हिमाचल सरकार ने भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी में संशोधन कर महिलाओं को बड़ी राहत दी है। अब महिलाओं को 80 लाख रुपये तक की भूमि खरीद पर चार फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होगी, इससे पहले यह छूट 50 लाख रुपये तक थी। पुरुषों को 50 लाख पर छह फीसदी और इससे अधिक की खरीद पर आठ फीसदी का प्रावधान है। इसके अलावा जनरल पावर आफ अटार्नी (जीपीए) शुल्क को 100 से 1000, 150 से 1500 और 200 से 2000 रुपये किया गया है। न्यूनतम 1000 पर 5000 रुपये स्टांप ड्यूटी किया गया है। प्रदेश सरकार ने विधानसभा में स्टांप ड्यूटी विधेयक में यह संशोधन प्रस्ताव पेश किया था। शुक्रवार को इसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। 

 

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