[ad_1]

हर्बल गुलाल तैयार करतीं टीआर कॉलेज की छात्राएं
– फोटो : संवाद
विस्तार
अलीगढ़ के टीकाराम कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने एक ऐसा सुगंधित गुलाल तैयार किया है, जिससे चेहरे लाल-पीले होंगे, लेकिन त्वचा को कोई नुकसान नहीं होगा। इस गुलाल से महक भी आती है। फूलों की पंखुड़ियां, आरारोट, खाने वाले रंग और खुशबू के तेल से छात्राएं गुलाल तैयार कर रहीं है।
प्राचार्य प्रो.शर्मिला शर्मा ने बताया कि छात्राओं का समूह सुगंधित गुलाल बना रही हैं। स्टाल लगाकर छात्राएं रोजाना 1200-1500 रुपये के गुलाल बेच रही हैं। छात्राओं ने कहा कि शिक्षिकाएं और छात्राएं गुलाल खरीद रही हैं। छात्राओं ने बताया कि गुलाल और वर्मी कंपोस्ट बनाती हैं। यह उनके पाठ्यक्रम में शामिल है।

ऐसा बनता है गुलाल
वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रो. रेखा आर्या ने बताया कि बीएससी और एमएससी की 50 छात्राएं सुगंधित गुलाल बना रही हैं। इसमें मुस्लिम छात्राएं भी हैं। गुलाल बनाने के लिए गेंदा, सफेद गुलदाउदी, देशी गुलाब की पंखुड़ियों को छांव में सुखाया जाता है, जिससे खुशबू और रंग बरकरार रहते हैं। पहले फूलों की पंखुड़ियों को 10-15 दिन सुखाया जाता है। ग्राइंडर में पीसकर छाना जाता है। इससे बारीक पाउडर बन जाता है। जितना पाउडर होता है, उतना ही आरारोट मिलाया जाता है। इससे गुलाबी, पीला, भगवा, नारंगी गुलाल व रंग बनाता है। गेंदा के साथ नारंगी, गुलाबी और लाल फूलों के साथ गुलाबी, हरा नीला रंग सफेद फूलों से बनता है। इसे लगाने से न तो चेहरा खराब होता है और न ही किसी तरह की खुजली नहीं होती है।

[ad_2]
Source link