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पितृपक्ष की सप्तमी पर पुरखों का आशीर्वाद लेने और परिजनों की सुख-समृद्धि की कामना से श्राद्ध व तर्पण करने वालों की भीड़ उमड़ी। तीर्थपुरोहितों ने बताया कि अबतक करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा तट से लेकर घाटों तक पितरों की प्रसन्नता और घर में सुख शांति के लिए पिंडदान का विधान निभा चुके हैं।
श्रद्धालुओं ने गंगा घाट पर अपने पितरों को जल देकर पुरोहितों, पंडितों के माध्यम से पूजन अर्चन कर घरों में सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान लोगों ने दान पुण्य भी किया।
गुरुवार को भगवान आदित्य की प्रथम किरण के साथ ही गंगा तट पर तर्पण व पिंडदान के विधान शुरू हो गए। पिशाचमोचन कुंड पर जहां त्रिपिंडी के लिए पूर्वांचल समेत आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे। गंगा के तट पर भी तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
अस्सी से लेकर राजघाट के बीच के सभी प्रमुख तीर्थ व घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने पुरखों के निमित्त सभी अनुष्ठान पूर्ण कराए।
मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के सप्तमी तिथि को तर्पण और श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और घर-परिवार में भी सुख शांति बनी रहती है।
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