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चांदी का रथ
– फोटो : अमर उजाला
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उत्तर भारत में प्रसिद्ध आगरा की रामलीला में 10 को राम बरात में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के स्वरूप चांदी के 45 साल पुराने रथ पर सवार होंगे। बनारस के कारीगरों ने इसे 6 साल में बनाया था। श्री विठ्ठलनाथ महाराज मंदिर रावतपाड़ा में यह बना। इसके बाद 1978 की रामलीला में पहली बार चांदी के सिंहासन और रथ पर भगवान के स्वरूप विराजमान हुए थे। तब इसकी लागत 3.50 लाख रुपये थी। अब बढ़कर करीब 200 गुना यानी करीब साढ़े 8 करोड़ रुपये हो गई है।
श्री रामलीला कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल बताते हैं कि वर्ष 1955 तक भरतपुर राजघराने से श्री राम बरात के लिए हाथी और चांदी का हौदा आता था। उसी पर भगवान राम की सवारी निकलती थी। बाद में यह व्यवस्था भंग हो गई। फिर 1971 में लाला कोकामल के साथ तुलसी राम सीता राम व 64 अन्य लोगों ने चांदी का रथ, सिंहासन, कुर्सियां, गदा और धनुष बाण बनवाए। चांदी का रथ बनाने की लागत तब 3.50 लाख रुपये आई थी। उस समय चांदी 285 रुपये किलो हुआ करती थी। समाज के लोगों ने बढ़चढ़ कर दान दिया था, तभी रथ बन पाया था। अब कीमत करीब 200 गुना बढ़ चुकी है। फिलहाल रामलीला मैदान में रथ को चमकाने और उसे बरात के लिए तैयार करने का काम चल रहा है।
रथ में है अनूठी कलाकारी
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