HP High Court: अदालत का अधिकारियों की तैनाती और पदोन्नति में हस्तक्षेप करना वांछनीय नहीं

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HP High Court: It is not desirable for the court to interfere in the posting and promotion of officers.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

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दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात किए जाने के मामले को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बंद कर दिया है। अदालत ने कहा कि प्रदेश में अधिकारियों की तैनाती और पदोन्नति के व्यापक क्षेत्र में हस्तक्षेप करना अदालत के लिए वांछनीय नहीं है। अदालत ने कहा कि जो अधिकारी जनहित याचिका में पक्षकार नहीं हैं उनकी प्रतिष्ठा और कॅरिअर पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। बता दें कि दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों पद तैनात किए जाने पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। वर्ष 2014 में राज्य सरकार ने संवेदनशील पदों पर तैनात 43 दागी अधिकारियों की सूची अदालत को सौंपी थी। 8 जनवरी 2014 को राज्य सरकार ने अदालत को अवगत करवाया था कि सभी दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटा दिया है। जनहित याचिका निपटारा करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई दागी अधिकारी संवेदनशील पद पर है तो यह मामला अदालत के समक्ष पूर्ण जानकारी के साथ उठाया जा सकता है।

कृषि विभाग के सर्वेक्षकों को संशोधित वेतनमान देने के आदेश

 वहीं, एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने कृषि विभाग के सर्वेक्षकों को संशोधित वेतनमान देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने उन्हें 1 अप्रैल 1984 से उद्योग विभाग के सर्वेक्षकों के बराबर वेतनमान देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समय-समय पर संशोधित वेतनमान का लाभ याचिका दायर करने से तीन साल पहले से जारी किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया। कृषि विभाग के सर्वेक्षक संघ ने वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के आदेशों के तहत उन्हें बढ़े हुए वेतनमान का वास्तविक लाभ 1995 से मिलेगा। खंडपीठ ने कृषि विभाग और उद्योग विभाग के सर्वेक्षकों में वेतनमान विसंगति को भेदभावपूर्ण ठहराया है। याचिकाकर्ता संघ ने दलील थी कि उनका भर्ती का तरीका, न्यूनतम योग्यता, कार्य की प्रकृति एवं दायित्व दोनों ही विभागों की एक जैसी है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कृषि विभाग के सर्वेक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। सरकार ने इन आदेशों को अपील के माध्यम से खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी।

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