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उपेंद्र कुशवाहा।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा जारी की गई शिक्षक भर्ती परीक्षा के रिजल्ट पर सवाल उठ रहे हैं। पहले तो अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया अब राजनेता भी सवाल उठा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनता दल प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के जरिए नीतीश सरकार पर सवाल उठाया है। उन्होंने महागठबंधन सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में लाखों नौकरी के दावों की असलियत अब सामने आने लगी है। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के आरोपों को समझेंगे तो लाखों नौकरी की सच्ची कहानी सामने आ जाएगी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तीन मुख्य बिंदुओं को उठाकर बिहार सरकार को घेरने की कोशिश की…
- ज्यादातर पूर्व से नियोजित शिक्षकों को ही बीपीएससी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति मिलनी है। यह संख्या कुल भर्ती का लगभग 25 प्रतिशत है।
- ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या बहुत ज्यादा है जो प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक तीनों में या एक से ज्यादा वर्गों में सफल दिखाए गए हैं।
- शिक्षक भर्ती में तमाम राज्यों की भांति बिहार सरकार ने भी डोमिसाइल नीति लागू करने की घोषणा की थी। जिसे उन्होंने न निभाकर भर्ती को अन्य राज्यों के लिए खोल दिया।
बीपीएससी ऑफिस के पास पहुंचे अभ्यर्थी उठा रहे सवाल
इधर, शिक्षक भर्ती परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाकर अभ्यर्थी कई सवाल खड़े कर रहे हैं। बिहार के अलग-अलग इलाकों से आए अभ्यर्थी अब परीक्षा परिणाम को लेकर आक्रोशित हैं। इनमें कई दिव्यांग अभ्यर्थी भी हैं। उनका कहना है कि हमलोग अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों से मिलना चाहते हैं। समस्याओं को बताना चाहते हैं, लेकिन गेट बंद है, अभ्यर्थियों से कोई अधिकारी मुलाकात नहीं कर रहा है। यह अन्याय है। आयोग को अभ्यर्थियों के सवालों का जवाब देना चाहिए।
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