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अहिल्या स्थान से अयोध्या की दंडयात्रा करते कामेश्वर मिश्रा और उनकी पत्नी।
– फोटो : अमर उजाला
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छोटे-बड़े पर्दे पर ऋषि-मुनि की तपस्या देखकर लोग चौंकते हैं। इनपर सवाल उठाने वालों को सनातन धर्मावलंबी जुबानी जवाब देते हैं। लेकिन, यह खबर पढ़ने के बाद आप यकीन करने को मजबूर होंगे कि करने वाले आज भी तपस्या कर ले रहे। लोग एक बार में लगातार 10 बार दंड-बैठक, यानी उठक-बैठक नहीं कर सकते। लेकिन, यह एक दिन में औसतन तीन किलोमीटर दंड देते हुए दरभंगा के अहिल्या स्थान से सीतामढ़ी के पुनौराधाम होकर अयोध्या श्रीराम मंदिर के लिए निकले हैं। पुजारी पति का साथ देने के लिए पत्नी भी दंड यात्रा पर हैं। 25 अक्टूबर को कामेश्वर कुमार मिश्रा और उनकी पत्नी अवंतिका मिश्रा दंड देते हुए निकले और आज, यानी 06 नवंबर को माता सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम पहुंचने का लक्ष्य है। अबतक लगभग 54-55 किलोमीटर की यात्रा हुई है। करीब 480 किलोमीटर की दूरी तय कर अयोध्या पहुंचना है। मतलब, कुल मिलाकर करीब 160 दिन इसी तरह यात्रा। रात में विश्राम की जगह पर कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं सुबह में निकलते समय रूद्राभिषेक…इस दिनचर्या में सहयोग में कई लोग साथ दे रहे हैं। बाकी सीता-राम, जय श्रीराम, जय हनुमान की गूंज तो दिनभर हर समय है।
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