हाईकोर्ट : ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मामला एक दिसंबर तक के लिए स्थगित, अदालत ने सुनाया फैसला

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High Court: Gyanvapi-Kashi Vishwanath case adjourned till December 1, court gives verdict

इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी ज्ञानवापी सर्वे मामले की हुई सुनवाई।
– फोटो : अमर उजाला।



विस्तार



                
                
                 
                    
                                     
                                                                                    
                        
                         



                                                                                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                

                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद मामलों की सुनवाई एक दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी। मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की सहमति से यह आदेश पारित किया।
                
                
                

                                                
                
                                                                                                                                
                                 
                

                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                
                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                

                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष यह केस मस्जिद समिति द्वारा दायर याचिकाओं से संबंधित हैं, जिसमें पूजा स्थलों (विशेष प्रावधान) द्वारा वर्जित ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा के अधिकार की मांग करने वाले हिंदू उपासकों द्वारा दायर मुकदमों की स्थिरता को चुनौती दी गई है। 
                
                
                

                                                                
                                                
                                                
                
                                                                                                                                
                                 
                

                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                
                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                

                
                
                

                                                
                
                                                                                                
                                 
                अधिनियम 1991 इससे पहले, 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद से संबंधित मामलों को किसी अन्य न्यायाधीश की पीठ से अपनी पीठ में स्थानांतरित करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

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