Gita Press: गीता प्रेस की पसंद बढ़ी… नहीं दे पा रहे 75 फीसदी किताबें

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Gita Press increased reader they not able to give 75 percent of books

गोरखपुर की पहचान गीता प्रेस।

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 भले ही नई पीढ़ी की रुचि पुस्तकों में कम हुई है, लेकिन गीता प्रेस की धार्मिक पुस्तकों के प्रति लगाव बढ़ा है। इसकी वजह मौजूद समय में लोग अपने बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करना चाहता है। गीता प्रेस से छपी पुस्तकों को माह। ज्यादा खरीदने लगे हैं, जिसके चलते गीता प्रेस मांग के अनुरूप 75 फीसदी पुस्तकें ही उपलब्ध करा पा रहा है।

गीता प्रेस से 100 वर्षों में 95 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है। अब गीता प्रेस ने अगले 23 वर्षों यानी वर्ष 2047 तक 200 करोड़ धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रबंधन ने प्रशासन से गीडा में 20 एकड़ भूमि मांगी है। – वहीं, आधुनिक मशीनों को मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी कहते हैं, एकल परिवारों की संख्या बढ़ने से पुस्तकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई हिंदू घर होगा जहां गीता प्रेस की पुस्तक न हो। श्रीमद्भागतव गीता, रामचरित मानस, हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती ये पुस्तक हर घर में अवश्य मिलेंगी।

 

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