ज्ञानवापी मस्जिद-विश्वेश्वर मंदिर मामला : मंदिर पक्ष ने पेश किया जेम्स प्रिंसेप का बनवाया 1836 का नक्शा

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ज्ञानवापी परिसर और काशी विश्वनाथ मंदिर

ज्ञानवापी परिसर और काशी विश्वनाथ मंदिर
– फोटो : अमर उजाला

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में शृंगार गौरी की नियमित पूजा किए जाने के मामले में दाखिल याचिका पर बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। इस दौरान मंदिर पक्ष की ओर से विश्वेश्वर मंदिर का एक पुराना नक्शा पेश करके बताया गया कि मंदिर में किन-किन स्थानों पर पूजा होती रही है। कोर्ट ने समयाभाव की वजह से बुधवार को तकरीबन आधे घंटे तक बहस सुनी, फिर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार की तिथि तय कर दी।

लक्ष्मी देवी तथा अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। इस दौरान मंदिर पक्ष की ओर से कहा गया कि विश्वेश्वर मंदिर का नक्शा बिट्रिशकालीन समय यानी 1836 में तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट जेम्स प्रिंसेप ने बनवाया था। मंदिर पक्ष की ओर से वीडिया कांफ्रेंसिंग के जरिये बहस कर हरिशंकर जैन ने बताया कि स्वयंभू विश्वेश्वर नाथ के चारों ओर आठ मंडप बने  थे। 

आज जहां तीन गुंबद एवं शृंगार गौरी, गणेश तथा दंडपाणि मंडप हैं, वहीं मूर्ति स्थापित थी, जिसकी पूजा की जा रही थी। इसे 1993 में बंद कर दिया गया जबकि, इसकेपहले शृंगार गौरी की नियमित पूजा होती रही। जैन ने अपनी बहस में मंदिर के पुराने इतिहास को दोहराया। समय की कमी को देखते हुए कोर्ट ने सुनवाई को एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में शृंगार गौरी की नियमित पूजा किए जाने के मामले में दाखिल याचिका पर बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। इस दौरान मंदिर पक्ष की ओर से विश्वेश्वर मंदिर का एक पुराना नक्शा पेश करके बताया गया कि मंदिर में किन-किन स्थानों पर पूजा होती रही है। कोर्ट ने समयाभाव की वजह से बुधवार को तकरीबन आधे घंटे तक बहस सुनी, फिर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार की तिथि तय कर दी।

लक्ष्मी देवी तथा अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। इस दौरान मंदिर पक्ष की ओर से कहा गया कि विश्वेश्वर मंदिर का नक्शा बिट्रिशकालीन समय यानी 1836 में तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट जेम्स प्रिंसेप ने बनवाया था। मंदिर पक्ष की ओर से वीडिया कांफ्रेंसिंग के जरिये बहस कर हरिशंकर जैन ने बताया कि स्वयंभू विश्वेश्वर नाथ के चारों ओर आठ मंडप बने  थे। 

आज जहां तीन गुंबद एवं शृंगार गौरी, गणेश तथा दंडपाणि मंडप हैं, वहीं मूर्ति स्थापित थी, जिसकी पूजा की जा रही थी। इसे 1993 में बंद कर दिया गया जबकि, इसकेपहले शृंगार गौरी की नियमित पूजा होती रही। जैन ने अपनी बहस में मंदिर के पुराने इतिहास को दोहराया। समय की कमी को देखते हुए कोर्ट ने सुनवाई को एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया।



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