HPU Shimla: उत्तर पुस्तिकाओं का अब तीसरा परीक्षक भी करेगा मूल्यांकन, बैठक में लिया फैसला

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सांकेतिक तस्वीर

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– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के स्नातक डिग्री कोर्स के खराब परीक्षा परिणाम की जांच के लिए बनी कमेटी की बुधवार को बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि करीब 2,000 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अब तीसरा परीक्षक करेगा। इससे पहले दो चरणों में 3,300 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया था। करीब 2,000 उत्तर पुस्तिकाओं में दो चरणों में हुए मूल्यांकन में अंकों में ज्यादा अंतर रहा।

इसलिए इनका अब तीसरा परीक्षक मूल्यांकन करेगा। बुधवार को जांच कमेटी अध्यक्ष अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. कुलभूषण चंदेल की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया कि जिन उत्तर पुस्तिकाओं में पहले किए मूल्यांकन और दूसरी बार किए मूल्यांकन में पाए गए अंकों में अधिक अंतर पाया गया है, उनका तीसरे परीक्षक से मूल्यांकन करवाया जाएगा। इसके लिए एक सप्ताह की समय अवधि निर्धारित की गई है। कमेटी तीसरे मूल्यांकन में दिए जाने वाले अंकों को देखकर बहुत अधिक खराब परिणाम वाले विषयों का पता लगाएगी।

इसके बाद खराब परिणाम के मूल कारणों का भी कमेटी पता करेगी। अब तक कमेटी ने ऑन स्क्रीन मूल्यांकन और ईआरपी सिस्टम के तहत मार्क्स अपलोड करने की जांच की है। प्रो. कुलभूषण चंदेल ने बताया कि खराब परिणाम को लेकर विद्यार्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों और असल कारणों का पता लगाने के बाद ही कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपेगी। उसके आधार पर ही तय होगा कि विवि फेल हुए यूजी प्रथम वर्ष के छात्रों को कोई राहत देगा या नहीं।

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के स्नातक डिग्री कोर्स के खराब परीक्षा परिणाम की जांच के लिए बनी कमेटी की बुधवार को बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि करीब 2,000 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अब तीसरा परीक्षक करेगा। इससे पहले दो चरणों में 3,300 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया था। करीब 2,000 उत्तर पुस्तिकाओं में दो चरणों में हुए मूल्यांकन में अंकों में ज्यादा अंतर रहा।

इसलिए इनका अब तीसरा परीक्षक मूल्यांकन करेगा। बुधवार को जांच कमेटी अध्यक्ष अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. कुलभूषण चंदेल की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया कि जिन उत्तर पुस्तिकाओं में पहले किए मूल्यांकन और दूसरी बार किए मूल्यांकन में पाए गए अंकों में अधिक अंतर पाया गया है, उनका तीसरे परीक्षक से मूल्यांकन करवाया जाएगा। इसके लिए एक सप्ताह की समय अवधि निर्धारित की गई है। कमेटी तीसरे मूल्यांकन में दिए जाने वाले अंकों को देखकर बहुत अधिक खराब परिणाम वाले विषयों का पता लगाएगी।

इसके बाद खराब परिणाम के मूल कारणों का भी कमेटी पता करेगी। अब तक कमेटी ने ऑन स्क्रीन मूल्यांकन और ईआरपी सिस्टम के तहत मार्क्स अपलोड करने की जांच की है। प्रो. कुलभूषण चंदेल ने बताया कि खराब परिणाम को लेकर विद्यार्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों और असल कारणों का पता लगाने के बाद ही कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपेगी। उसके आधार पर ही तय होगा कि विवि फेल हुए यूजी प्रथम वर्ष के छात्रों को कोई राहत देगा या नहीं।



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