Amroha Double Murder: ससुर और ननद के कत्ल में बहू भी शामिल, गोद ली बहन से खफा रहता था हत्यारोपी बेटा इशांक

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मकान बेचने से मना करने पर बेटे ने ही सराफ योगेश चंद्र अग्रवाल और उनकी गोद ली बेटी सृष्टि की हत्या पत्नी और एक नौकर के साथ मिलकर की थी। पुलिस ने चौबीस घंटे के भीतर सराफ और उनकी बेटी की हत्या का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने सराफ के हत्यारोपी बेटे, बहू समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार का न्यायालय पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस का दावा है कि इशांक अग्रवाल गोद ली हुई बहन सृष्टि से भी खफा रहता था। उसे यही लगता था कि पिता योगेश चंद्र अग्रवाल की मौत के बाद उसकी प्रॉपर्टी में बराबर की हिस्सेदार बन जाएगी।




उतना ही नहीं उसे शक था कि उसके पिता कहीं सारी संपत्ति सृष्टि के नाम न कर दें। रविवार को नगर कोतवाली में एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि मोहल्ला नगर के कटरा गुलाम अली में रहने वाले सराफ योगेश चंद्र अग्रवाल और उनके पुत्र हत्यारोपी इशांक अग्रवाल के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इशांक अग्रवाल अपने हिस्से के मकान को बेचकर दिल्ली में शिफ्ट होना चाहता था, लेकिन योगेश चंद्र अग्रवाल इसके आड़े आ रहे थे।

 


दोनों पिता-पुत्र के संबंध अच्छे नहीं थे। पुलिस का दावा है कि योगेश चंद्र अग्रवाल का व्यवहार अपनी बहू मानसी अग्रवाल के प्रति भी खराब था। जिससे आहत होकर इशांक अग्रवाल ने अपने पिता योगेश चंद्र अग्रवाल और बहन सृष्टि की हत्या करने की योजना बनाई। हत्या करने के लिए इशांक अग्रवाल ने अपनी दिल्ली स्थित फैक्टरी में काम करने वाले नौकर बरेली निवासी अनिल गंगवार को पैसों का लालच देकर अपने घर बुलाया। 


इसके बाद पत्नी मानसी अग्रवाल के साथ मिलकर पिता योगेश चंद्र अग्रवाल और बहन सृष्टि की दरांती से गला रेत कर हत्या कर दी। एसपी ने बताया की हत्यारोपी इशांक अग्रवाल, उसकी पत्नी मानसी अग्रवाल और बरेली जनपद के नवाबगंज थानाक्षेत्र के गांव जोरा मकरंदपुर निवासी अनिल गंगवार को गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

 


इशांक पर पहले से हत्या का शक

पुलिस का दावा है कि इशांक और उसके पिता योगेश चंद्र अग्रवाल में विवाद होता रहता था। इशांक अपने पिता को पसंद नहीं करता था। यही वजह है कि करीब ढाई साल पहले योगेश चंद अग्रवाल ने इशांक को अपनी ज्वेलरी की दुकान से हटा दिया था। तभी से इशांक दिल्ली में गत्ते की फैक्टरी चलता था। मामा अतुल गर्ग का कहना है कि इस फैक्टरी को लगाने के लिए भी योगेश चंद्र ने इशांक को 40 लाख रुपये दिए थे।

 


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