हाईकोर्ट : निर्धारित योग्यता के बिना 32 वर्ष तक नौकरी, सेवानिवृत्ति के तीन दिन पहले हुए निलंबित

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Job for 32 years without prescribed qualification, suspended three days before retirement

कोर्ट (प्रतीकात्मक)
– फोटो : istock

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर में सहायक अध्यापक के पद पर 32 वर्ष तक कार्य करने वाले शिक्षक को पद के लिए योग्य न मानते हुए बीएसए के आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि याची ने कोई धोखाधड़ी की है। ऐसे में उससे वर्षो का वेतन वसूलना अन्याय होगा।

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की कोर्ट ने याची को दिया गया वेतन तथा अन्य वित्तीय लाभ नहीं वसूलने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी। याची की ओर से अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी और विभाग की ओर से शासकीय अधिवक्ता एलएम सिंह ने पक्ष रखा। मामले में याची शिवदत्त शर्मा, बड़ागांव खास, बुलंदशहर के रहने वाले हैं। याची पिता की मृत्यु पर मृतक आश्रित कोटे से जूनियर हाईस्कूल, बड़ागांव, अरनिया में चौकीदार के पद पर नियुक्त हुआ। इस दौरान अवैतनिक अवकाश लेकर बीएड किया।

फिर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश पर परिषदीय अध्यापकों की नियुक्ति/पदोन्नति समिति की ओर से वह प्राइमरी स्कूल बादौली , दनकौर, बुलंदशहर में सहायक अध्यापक नियुक्त हुए। तकरीबन 32 वर्ष तक नौकरी के बाद सेवानिवृत्ति की तिथि 31 मार्च, 2019 से कुछ माह पहले वह प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर, पहाड़गढ़ी में प्रधानाचार्य के पद पर थे।

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