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bharat Jodo Yatra- Rahul Gandhi
– फोटो : Amar Ujala
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राहुल गांधी दिल्ली के प्रसिद्ध मरघट वाले हनुमान जी के दर्शन कर तीन जनवरी से भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के दूसरे चरण की शुरुआत करेंगे। इसके बाद पुराने लोहे के पुल से होते हुए यात्रा शास्त्री पार्क, सीलमपुर, मुस्तफाबाद और गोकलपुरी की उस एरिया से गुजरेगी, जहां फरवरी 2020 में दंगे भड़क उठे थे और इसमें 53 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। दंगा प्रभावित क्षेत्र से यात्रा को ले जाकर राहुल गांधी सभी वर्गों तक लोगों को जोड़ने का विशेष संदेश देना चाहते हैं, जिसकी बात वे अपनी यात्रा की शुरूआत से अब तक करते आ रहे हैं।
इस अवसर पर कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। कांग्रेस सेवा दल की ओर से यात्रा को सफल बनाने के लिए जबरदस्त तैयारियां की गई हैं। यात्रा के बीच-बीच में जगह-जगह पर राहुल गांधी के स्वागत का कार्यक्रम बनाया गया है। इस दौरान सीलमपुर में राहुल गांधी गुरुद्वारे में जाकर माथा भी टेकेंगे। दिल्ली के बाद यात्रा बागपत और गाजियाबाद के लिए प्रस्थान करेगी जहां उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता यात्रा का स्वागत करेंगे।
परंपरागत वोट बैंक को वापस लाने की चुनौती
राहुल गांधी की दूसरे चरण की यात्रा दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों से होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाएगी। इसके बाद यात्रा पंजाब से होकर जम्मू-कश्मीर तक जाएगी जहां उसका समापन होगा। इन सभी क्षेत्रों में कांग्रेस लंबे समय तक राजनीतिक दृष्टि से बहुत मजबूत रही थी। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मुस्लिम बहुल आबादी और दलित-पिछड़ा वोट बैंक कांग्रेस की बड़ी ताकत हुआ करता था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मुस्लिम बहुल आबादी और दलित-पिछड़े वोट बैंक के सहारे कांग्रेस इन क्षेत्रों में लंबे समय तक मजबूत बनी रही।
लेकिन दिल्ली और पंजाब में उसे अपनी यह राजनीतिक ताकत आम आदमी पार्टी के हाथों गंवानी पड़ी, तो उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के राजनीतिक उभार ने उसका वोट बैंक खींच लिया। राहुल गांधी के सामने इन क्षेत्रों में पार्टी के इस परंपरागत वोट बैंक को वापस लाने की कड़ी चुनौती है।
हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक के बीच वापसी करती हुई दिखाई पड़ी है। भाजपा के हाई प्रोफाइल प्रचार की रणनीति के बाद भी पार्टी हिमाचल प्रदेश में वापसी करने में कामयाब रही है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जनता की तरफ से कांग्रेस को संकेत है कि यदि वह जमीनी मुद्दों के साथ जमीन पर उतरे तो उसे सफलता मिल सकती है। राहुल गांधी की यात्रा को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
क्या है उद्देश्य?
कांग्रेस सेवा दल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार ने अमर उजाला से कहा कि कुछ विभाजनकारी लोगों की सोच के कारण उत्तर-पूर्वी दिल्ली की एरिया में दंगे भड़क उठे थे। जो लोग सैकड़ों साल से एक साथ मिलजुल कर रहते आए थे, उनके बीच अचानक दूरी पैदा हो गई। इससे नुकसान दोनों पक्षों को उठाना पड़ा और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि समाज में वह दूरी अभी भी बरकरार है, लेकिन राहुल गांधी उस दूरी को पाटना चाहते हैं।
वे चाहते हैं कि लोग एक दूसरे के करीब आएं और उसी तरह रहें जैसा कि वे सैकड़ों साल से रहते आए थे। यही कारण है कि यह यात्रा दिल्ली दंगा प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान राहुल गांधी दंगा पीड़ित लोगों से भी मुलाकात करेंगे। चूंकि उन्होंने स्वयं आतंकवाद का दंश सहा है, वे इन परिवारों का दर्द समझते हैं और इनका दर्द बांटना चाहते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इन पीड़ित परिवारों के लिए बहुत कुछ करने की घोषणाएं की गई थीं, लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया है। कांग्रेस इनका दर्द बांटना चाहती है।
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