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ड्रोन(प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : pixabay
विस्तार
उत्तराखंड में उड़ने वाला हर ड्रोन अब पुलिस की नजरों के सामने रहेगा। पुलिस ही उसे अनुमति देगी कि टेक ऑफ करना है या लैंडिंग। पुलिस अब अनमैंड ट्रैफिक मैनेजमेंट (यूटीएम) सॉफ्टवेयर तैयार करा रही है। इसके लिए दिल्ली की एक कंपनी से करार किया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर पर प्रत्येक ड्रोन संचालकों को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। पुलिस इस सॉफ्टवेयर का अगले सप्ताह ट्रायल करेगी।
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दरअसल, अभी तक कौन, कहां और क्यों ड्रोन उड़ा रहा है इस पर नजर रखने के लिए पुलिस के पास कोई तंत्र नहीं है। जबकि, प्रदेश के कई हिस्सों में छोटे मालवाहक ड्रोन भी उड़ाए जा रहे हैं। इनसे दवाएं, ब्लड सैंपल और तमाम तरह की सामग्रियों को दूर दराज के इलाकों में पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में कुछ असामाजिक तत्व इसका गलत फायदा भी उठा सकते हैं। लिहाजा, पुलिस ने इस तंत्र को विकसित करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी से हाथ मिलाया है।
यह कंपनी पुलिस के लिए यूटीएम सॉफ्टवेयर विकसित कर रही है। इस पर हर ड्रोन को पंजीकृत किया जाएगा। इससे टेक ऑफ होने से लेकर रूट और लैंडिंग तक की लाइव लोकेशन पता चल जाएगी। यदि कोई ड्रोन बिना पंजीकरण उड़ाया जा रहा है तो उसे जैमर से जाम भी कर दिया जाएगा। इस सॉफ्टवेयर पर मालवाहक ड्रोन से लेकर शौकिया उड़ाने वालों को भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
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