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करारी के मोज्जमपुर में केले की खेती दिखाता किसान।
– फोटो : अमर उजाला।
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खेती से भी तरक्की की इबारत लिखी जा सकती है। जरूरत है तो सिर्फ लगन और कड़ी मेहनत की। उत्साह बढ़ाने के लिए कही जाने वाली ऐसी बातों को सदर ब्लॉक के अंगद कुशवाहा ने साबित कर दिखाया है। एक दौर वह था जब अंगद का परिवार पाई-पाई के लिए मोहताज था। लेकिन, मजबूत इरादों की बदौलत केले की खेती कर उन्होंने इसे खुशहाली में बदल दिया। अंगद दूसरे किसानों को भी केले की खेती करके चार गुना तक कमाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मोज्जमपुर करारी निवासी 42 वर्षीय अंगद कुशवाहा की गिनती न केवल कौशाम्बी बल्कि आसपास के जिलों तक प्रगतिशील किसानों में होती है। उन्हें यह पहचान व सम्मान केले की खेती से मिला है। इस वक्त भले ही वह 42 बीघे के काश्तकार हों, लेकिन एक समय ऐसा था जब खेत के नाम पर एक बिस्वा भी भूमि नहीं थी। 38 साल पहले अंगद का परिवार बेहद गरीबी से जूझ रहा था। पिता बच्चा लाल बटाई पर खेती करते थे। बहुत मुनाफा भी नहीं होता था।
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