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स्टोर में ट्रांसफार्मर की मरम्मत करते कर्मचारी
विस्तार
जहां एक ओर झमाझम बारिश से मौसम खुशनुमा हो गया और लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। वहीं ऊर्जा निगम के अफसरों के बरसात में भी पसीने छूट रहे है। क्योंकि तापमान में गिरावट आने के बावजूद ट्रांसफार्मर धधक रहे है।
आपको जानकार हैरानी होगी कि बरसात के इन मात्र तीन दिनों के अंदर पश्चिमांचल के 14 जनपदों में 382 ट्रांसफार्मर फुंक गए है, जिनकी मरम्मत में लाखों रुपयें खर्च हो चुके है, फिर भी लोगों को बिजली संकट से मुक्ति नहीं मिल रही है।
एक सप्ताह पूर्व लोग उमस व भीषण गर्मी से बिलबिला उठे थे, लेकिन सात जुलाई से शुरू हुई बरसात के बाद मौसम खुशनुमा हो गया। आमजनों और किसानों के चेहरे तक खिल उठे, हालांकि यह बरसात ऊर्जा निगम के अफसरों के लिए आफत बनकर जरूर आई। ताज्जुब की बात यह है कि बरसात के इन तीन दिनों में पश्चिमांचल के 14 जनपदों में 382 ट्रांसफार्मर तापमान में गिरावट के बावजूद धधक उठे।
इससे ऊर्जा निगम के अफसरों को तो दिक्कते हुई, आमजनों को भी बिजली संकट से जूझना पड़ा। इतना ही नहीं इन फुंके ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराने में विभाग के तकरीबन 60 लाख रुपयें खर्च हो गए, लेकिन फिर भी लोगाें को बिजली संकट से मुक्ति नहीं मिली। यदि जनपदवार ट्रांसफार्मर फुंकने की बात करें तो सबसे ज्यादा बुलंदशहर में 53 ट्रांसफार्मर फुंके है। इसके बाद सहारनपुर में 45 ट्रांसफार्मर फुंकेे है, जबकि सबसे कम गाजियाबाद में मात्र 11 ट्रांसफार्मर फुंके है। इसके बाद शामली में 15 ट्रांसफार्मर फुंके है, जबकि बागपत जनपद में 17 ट्रांसफार्मर फुंके है।
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