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रात 11.30 बजे जब मूसलाधार बारिश के बीच तेज आवाज सुनाई दी, तो नींद टूट गई और लगा कहीं बादल फट गया। मन में अनहोनी की आशंका घर कर गई और घबराहट हो रही थी। इस दौरान बाहर कुछ लोगों की आवाज सुनी तो मैं भी कमरे से बाहर आ गया। तभी कुछ लोग दौड़ते हुए आए और बोले कि डाट पुल के पास पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ है, कुछ दुकानें भी ध्वस्त हो गईं हैं।
इसके बाद, हम सभी लोग मौके पर पहुंचे तो वहां का मंजर डरावना था। बोल्डर और मलबे के बीच दुकानों का कोई पता नहीं था। सिर्फ लोहे व बांस के कुछ एंगल दिखाई दे रहे थे। जो हालात हैं, उसे देखकर डर लग रहा है। ये कहना है गौरीकुंड के मोहन चंद्र गोस्वामी का।
मोहन बताते हैं कि सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच दिन में शटल सेवा के साथ ही पैदल यात्री भी चलते हैं। ऐसे में दिन में हादसा हुआ होता तो जानमाल का और अधिक नुकसान हाेता। सड़क बेहद संकरी है और उसके ऊपरी तरफ खड़ी पहाड़ी से पत्थर गिरने का पहले से पता नहीं चलता।
नीचे ऊफान पर मंदाकिनी नदी बह रही है। ऐसे में किसी भी हादसे में बचाव का कोई भी उपाय नहीं होता। स्थानीय निवासी गौरी शंकर गोस्वामी और रामचंद्र गोस्वामी का कहना है कि जिस तरह से बादलों की गर्जना के साथ तेज आवाज हुई, तो जून 2013 की आपदा की याद आ गई।
डर और बेचैनी के बीच हम लोग जैसे-तैसे मौके पर पहुंचे, तब तक रेस्क्यू दल के लोग भी पहुंच चुके थे। बारिश के बीच टार्च की रोशनी में खोजबीन संभव नहीं थी, लेकिन इतना समझ में आ गया था कि नुकसान काफी हुआ है।
बता दें कि रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर गौरीकुंड बाजार से 500 मीटर पहले डाट पुल के पास भारी भूस्खलन से 19 लोग मलबे में लापता हो गए थे। शुक्रवार देर शाम तक रेस्क्यू करते हुए दो शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि 17 लोग अब भी लापता हैं।
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