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जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने पिछले दो साल में अपने परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। अन्य राज्य बोर्ड की तरह अब जेके बोर्ड भी सीबीएसआई के पैटर्न को अपना रहा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में काफी उपयोगी साबित होता है। बोर्ड को बहुवैकल्पीय प्रश्नपत्रों की संख्या बढ़ानी चाहिए। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बढ़ा है, लेकिन निजी स्कूलोें की तरह सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को हर बच्चे के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा। सीबीएसआई पैटर्न को अपनाने में देरी के कारण बोर्ड परीक्षाओं के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदेश के बच्चे पिछड़ जाते हैं। इसके लिए जेके बोर्ड सीबीएसआई पैटर्न को अपनाए, यह कहना है 12वीं कक्षा की मेरिट सूची में आने वाले मेधावी विद्यार्थियों का। विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लोन सहित अन्य परेशानियां बयां कीं।
नौगाम (श्रीनगर) के शाहीद बशीर 12वीं कक्षा में साइंस संकाय के टॉपर हैं। शाहीद ने 99.2 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर संभाग में बोर्ड परीक्षा अक्तूबर-नवंबर में होती थी, लेकिन इस बार मार्च-अप्रैल में थी। इससे मानिसक दबाव था। हालांकि हमें दो महीने का अतिरिक्त समय पढ़ाई के लिए मिला। उन्होंने कहा – जेके बोर्ड सीबीएसआई पैटर्न को अपना रहा है। बोर्ड परीक्षा का पैटर्न में बहुवैकल्पीय प्रश्नपत्रों की संख्या को बढ़ाना चाहिए, जिससे हमें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी। सरकार स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ रही है, जिसका असर परिणामों में दिख रहा है।
शेखबाग (श्रीनगर) के मुस्तकीम अफाक साइंस संकाय में दूसरे टॉपर है। उन्होंने 99 फीसदी अंक हासिल किए हैं। अफाक ने कहा, 12वीं कक्षा की शुरुआत से वैचारिक अध्ययन पर फोकस किया। बोर्ड परीक्षा अक्तूबर-नवंबर में होगी यही सोच रखा था, लेकिन जब परीक्षा मार्च-अप्रैल में हुई तो थोड़ी परेशानी आइ। सर्दियों के दौरान तीन महीने का समय चुनौतीपूर्ण था। उस समय का सही उपयोग किया और सफलता हासिल की। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के सत्र में और सुधार की जरूरत है। बोर्ड परीक्षा का मूल्यांकन और परीक्षा पैटर्न को अपनाने की जरूरत है।
हायफा साजद ने 12वीं साइंस संकाय में 98.8 प्रतिशतक अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। शेखबाग श्रीनगर की रहने वाली हायफा जब छोटी थीं तब उनके पिता का निधन हो गया। मां बाॅटनी की लेक्चरर हैं। हायफा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में मां का बड़ा सहयोग रहा है। 11वीं कक्षा से मैंने अपनी तैयारी को शुरू किया था। नीट प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाना मेरा उद्देश्य है। पिता का साया सिर से उठने से बच्चे को कई मुश्किलों का समाना करना पड़ता है, लेकिन मां ने हर कदम पर साथ दिया है। पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक रूप से खुद को कैसे मजबूत करें, इसके बारे में भी बताया।
मीरबा मुमताज ने 12वीं कक्षा के आट्स संकाय में 97.2 प्रतिशित अंक हासिल किए हैं। मुमताज ने कहा कि परीक्षा की तैयारी शुरू से ही की। जेके बोर्ड को अपने परीक्षा पैटर्न में बदलाव करना चाहिए। बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूल से ही तैयार हों, इस तरह का परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम होना चाहिए। उन्होंने कहा – सरकारी स्कूलों में सुविधा बढ़ रही है, लेकिन और सुधार की जरूरत है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा काफी अच्छी है।अमर उजाला से सम्मानित होना मेरे लिए गर्व की बात है।
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