Apples in Kashmir: कश्मीर में हाइब्रिड सेब की बाजार में दस्तक, अच्छी फसल देख उत्पादकों के चेहरे चमकें

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कश्मीर घाटी का सेब देश-दुनिया में मशहूर है। यहां का हाइब्रिड सेब बाजार में पहुंच चुका है। बंपर फसल और अच्छे दाम मिलने से उत्पादकों के चेहरों पर भी चमक है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले की चाडूरा तहसील के वडीपोरा गांव के रहने वाले नजीर अहमद मलिक सेब उत्पादक हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से सेब का उत्पादन करते आ रहे हैं। 25-30 कनाल जमीन पर रिवायती सेब की किस्में लगाई हैं। इनमें कुल्लू और डेलीशस सेब आदि शामिल हैं।



इसके अलावा करीब 11 कनाल जमीन पर हाइब्रिड सेब की खेती की है। इसमें गाला, जीरो माइन आदि सेब की किस्में हैं। उन्होंने कहा कि रिवायती और हाइब्रिड फसल में जमीन आसमान का फर्क है। नजीर के अनुसार जहां रिवायती फसल नवंबर के पहले सप्ताह में आना शुरू होती है, वहीं यह फसल इस वक्त बाजारों में आना शुरू हो चुकी है। अगस्त के दूसरे सप्ताह से यह फसल आना शुरू हो जाती है।


11 कनाल की खेती में निकले 2000 क्रेट सेब

नजीर अहमद मलिक ने बताया कि वह चार साल से हाइब्रिड फसल का उत्पादन कर रहे हैं। रिवायती उत्पादन से हाइब्रिड का उत्पादन करीब 70 फीसदी ज्यादा है। बताया कि 11 कनाल की हाइब्रिड खेती में इस बार करीब 2000 क्रेट सेब निकले हैं। प्रति क्रेट 17 किलो के हिसाब से कुल 34 हजार किलो उत्पादन होता है।

उन्होंने कहा कि हाइब्रिड की खेती में मेहनत भले ही है, लेकिन उसका फायदा भी मिलता है। नजीर ने कहा कि इस खेती में साल भर मेहनत करनी पड़ती है। जैसे घास कटाई, गुड़ाई, देखरेख आदि। यह फसल रिवायती फसल की तरह बारिश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसे ड्रिप इरीगेशन के जरिये पानी दिया जाता है।

 


साल में 5 लाख आया खर्च, 25 लाख का होगा मुनाफा

नजीर मलिक के अनुसार, 11 कनाल की हाइब्रिड खेती पर साल का करीब 5 लाख का खर्च आया है। हालांकि करीब 25 लाख का मुनाफा भी मिलेगा। इस साल करीब 85-90 रुपये प्रति किलो फसल का रेट मिल रहा है, जो आगे बाजारों में करीब 120-130 रुपये प्रति किलो बिकता है। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड की खेती फल उत्पादकों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सेब की खेती का पूरा परिदृश्य बदलने वाला है, क्योंकि हाइब्रिड सेब की कई किस्में आने वाली हैं।

 


हॉर्टिकल्चर विभाग फल उत्पादकों की करता है मदद

हाइब्रिड सेब की खेती के लिए हॉर्टिकल्चर विभाग भी फल उत्पादकों की मदद करता है। नजीर मलिक बताते हैं कि हाइब्रिड सेब का फार्म बनाने के लिए उन्होंने करीब 30 लाख रुपये खर्च किए, जिसका 50 प्रतिशत विभाग द्वारा खर्च दिया गया। उन्होंने कहा कि नए उत्पादकों को सलाह है कि वो हाइब्रिड सेब की खेती की ओर रुझान दिखाएं। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा होगा। इसका रेट दूसरे सेब से ज्यादा मिलता है।


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