Teachers Award: शिक्षा से उजियारा भरने वाले गुरुओं का सम्मान, जानें कैसे लीक से हटकर काम कर पाया मुकाम

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 नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय हमीरपुर के गणित विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. ज्ञान चंद राणा के 136 शोध पत्र भारत समेत दुनिया भर के शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके शोध भारत, अमेरिका, इंग्लैंड, नीदरलैंड, रूस, जर्मनी, पोलैंड, अर्जेंटीना, बुल्गारिया, ब्राजील, सर्बिया, रोमानिया, मलयेशिया, तुर्की, चीन, चेकोस्लोवाकिया, ईरान, हंगरी तथा इटली की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। यह प्रदेश में कॉलेज प्रोफेसर की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के गणित विभाग में किसी भी प्रोफेसर के 130 पत्र शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित नहीं हुए हैं।

1290 शोधकर्ताओं ने राणा के पत्रों का विवरण अपने पेपरों में दिया है। इनका शोध कार्य फ्लुइड्स डायनामिक्स पर आधारित है। इसमें उन्होंने नैनो फ्लूइड, वाल्टर्स फ्लूइड, रिव्लिन-एरिक्कसन फ्लूइड और कपल स्ट्रेस फ्लूइड, जेफ्फे फ्लूइड आदि पर काम किया। डॉ. राणा ने बताया कि आजकल नैनो फ्लूइड बहुत से क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है जैसे मोटर वाहन उद्योग, ऊर्जा बचत में, नाभिकीय रिएक्ट्रस में, कैंसर के उपचार में, बिजली संयंत्र की कूलिंग प्रणाली में, पेट्रोलियम उद्योग में, न्यूक्लेयर संयंत्र की कूलिंग प्रणाली में उपयोग होता है।

डॉ. राणा ने 40 राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है। इनमें 21 शोध पत्र नैनो फ्लूइड, कपल स्ट्रेस फ्लूइड, हिमाचल प्रदेश की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, आपदा प्रबंधन, प्रौद्योगिकी के सामाजिक विकास पर प्रभाव विषयों पर प्रस्तुत किए हैं। उनके पढ़ाए विद्यार्थी देश-विदेश के जाने-माने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों तथा कंपनियों सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. राणा गरीब और मेधावी बच्चों को गणित की पुस्तकें भी उपलब्ध करवाते हैं। डॉ. राणा का जन्म गांव धरोह, तहसील सरकाघाट, जिला मंडी में हुआ है।

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