Agra: सफाई की खुली पोल, फिसड्डी रह गया आगरा; नगर निगम के पांच स्टार के दावे पर मिला एक स्टार

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Agra Municipal Corporation got only one star in garbage free rating

आगरा नगर निगम
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


स्वच्छ भारत मिशन शहरी में गारबेज फ्री रेटिंग जारी कर दी गई। कचरा मुक्त करने के कदमों में उत्तर प्रदेश का आगरा नगर निगम फिसड्डी साबित हुआ और केवल एक स्टार ही मिल सका। हालांकि आगरा नगर निगम ने पांच स्टार रेटिंग के लिए आवेदन किया था। 

डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन बेहद कम होने, घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग न लेने, प्रोसेसिंग, यूजर चार्ज जैसे 12 मानकों पर परखे गए आगरा नगर निगम के दावों की पोल इस रेटिंग से खुल गई। पड़ोसी फिरोजाबाद नगर निगम को 3 स्टार रेटिंग हासिल हुई। इस रेटिंग का असर आगरा के स्वच्छता सर्वे पर पड़ना तय है।

स्टार पाने के लिए ये हैं मानक- मानक प्रतिशत

  • डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कम से कम 60 फीसदी होना चाहिए
  • स्रोत पर कचरा अलग करना कम से कम 25 फीसदी होना चाहिए
  • हर दिन सड़कों की सफाई 100 फीसदी होनी चाहिए
  • गीले-सूखे कचरे के कूड़ेदान कम से कम 25 फीसदी हों
  • कचरे की प्रोसेसिंग 25 फीसदी कचरा प्रोसेस किया जाए
  • शिकायतों का निदान स्वच्छता एप की 5 फीसदी शिकायतें दूर हों

 

गारबेज फ्री रेटिंग में पिछड़ने के कारण

  • नगर निगम की डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना महज 27 फीसदी ही हो रही है। जबकि भुगतान 65 प्रतिशत के हिसाब से स्वच्छता कारपोरेशन को किया जा रहा है। नगर निगम सदन में पार्षदों ने इसकी असलियत बयान की थी।
  • नगर निगम स्रोत से यानी घरों से कचरा अलग-अलग एकत्र नहीं कर पाया, जबकि गाड़ियां दो टब वाली गीले और सूखे कचरे के लिए आती हैं। मिश्रित कचरे के कारण आगरा को रेटिंग में नंबर ही नहीं मिले
  • नालियों से निकाली गई सिल्ट 4 से 6 दिनों तक दुकानों, घरों के सामने ही पड़ी रही, जबकि सड़कों, सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी, कचरा दिखना ही नहीं चाहिए था। सर्वे के दौरान लोगों ने नगरनिगम के लिए बेहद खराब फीडबैक दिया।
  • कूड़े में आने वाली निर्माण सामग्री का उपयोग नहीं करने से भी नगर निगम को अंक नहीं मिल पाए। गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे से विभिन्न धातुओं आदि को निकालने के लिए उपयोग करना था, लेकिन निगम कागजों में ही इनकी सुविधा बना पाया। पर्याप्त मात्रा में यह नहीं हो पाया।
  • अधिक कूड़ा उत्पादन पर पूरे साल ही आगरा नगर निगम दिखावे की कार्रवाई करता रहा। ढाई हजार के करीब ऐसे उत्पादकों को नोटिस के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी ने बहुमंजिला इमारतों, होटलों से कचरा ही नहीं उठाया।

 

मेयर के कामकाज का यह पहला रिपोर्ट कार्ड

मेयर हेमलता दिवाकर और उनके 100 पार्षदों के बोर्ड के कामकाज का यह पहला रिपोर्ट कार्ड है, जिसमें नगर निगम फिसड्डी साबित हुआ। उनके कार्यकाल के 250 दिनों में सड़कों की सफाई, डोर टू डोर, नालों की सफाई, झाडू लगाने की व्यवस्था ठीक नहीं हो पाई।

सातवें अजूबे का शहर इनसे भी पिछड़ा-शहर रेटिंग

 

  • वाराणसी 3 स्टार
  • लखनऊ 3 स्टार
  • झांसी 3 स्टार
  • अलीगढ़ 3 स्टार
  • फिरोजाबाद 3 स्टार
  • आगरा छावनी को 3 स्टार

गारबेज फ्री सिटी की रैंकिंग में आगरा नगर निगम जहां पिछड़ गया, वहीं आगरा छावनी परिषद को तीन स्टार मिले। हालांकि बीते साल के स्वच्छता सर्वे में आगरा छावनी परिषद की स्थिति खराब रही थी और लगातार रैंकिंग में गिरावट हो रही थी लेकिन खेरिया मोड़ से माल रोड होते हुए फतेहाबाद रोड तक की गई सफाई का छावनी को फायदा हो गया।

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