Agra News: साइबर ठगों के 600 सिम-मोबाइल पर ‘पुलिस का ताला’, केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट

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Agra News 600 SIMs and mobiles used in the fraud have been discontinued

Cyber Crime
– फोटो : Agency (File Photo)

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साइबर अपराधी नए-नए प्रलोभन देकर लोगों से ठगी कर रहे हैं। पहले काॅल करते हैं, फिर खाते साफ करते हैं। साइबर सेल अब इन अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई कर रही है। पिछले चार महीने में ठगी में इस्तेमाल 600 सिम और मोबाइल को बंद करा दिया गया है। इसके लिए रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय, साइबर मुख्यालय और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) को भेजी गई थी।

साइबर अपराधी कई लोगों से धोखाधड़ी करने के बाद सिम तोड़ देते हैं। मोबाइल वही रहता है। नया सिम डालकर फिर से ठगी करते हैं। मगर, अब पुलिस सिम बंद कराने के साथ मोबाइल भी बंद करा रही है। इससे साइबर अपराधी को अपराध के लिए हर बार नया मोबाइल लेना होगा। एक बार मोबाइल बंद कराने के बाद दोबारा चालू नहीं किया जा सकता है।

चार महीने में डेढ़ करोड़ की ठगी

साइबर सेल से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल में साइबर ठगों ने तकरीबन 1.50 करोड़ की ठगी की। इनके लिए अलग-अलग नंबरों का इस्तेमाल किया। कई बार एक ही व्यक्ति को काॅल करने के लिए कई सिम इस्तेमाल किए गए। मोबाइल एक ही था। इसका पता आईएमईआई नंबर से चला। पुलिस ने मोबाइल नंबर और आईएमईआई नंबर से सूची तैयार की। इसको स्टेट साइबर हेड क्वार्टर, केंद्रीय गृह मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम को रिपोर्ट भेजी गई। इसके बाद 600 सिम और मोबाइल को बंद करा दिया गया। साइबर सेल हर महीने नंबर और मोबाइल के आईएमईआई नंबर को चिह्नित करके रिपोर्ट भेज रही है।

जिस लोकेशन से काॅल, वहां की आईडी नहीं

साइबर सेल की जांच में सामने आया कि जिस लोकेशन से साइबर अपराधियों ने लोगों को काॅल किया, वहां की आईडी पर सिम नहीं लिए गए थे। उदाहरण के लिए बिहार से काॅल किया गया तो सिम में लगी आईडी पश्चिम बंगाल की लगी थी। कई बार आईडी पश्चिम बंगाल की थी, जबकि लोकेशन नूंह (हरियाणा) की आई थी। इस तरह बिहार पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड और हरियाणा के नूंह की लोकेशन और आईडी निकली। जिन आईडी का इस्तेमाल किया गया, वाे फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगाकर ली गई थीं।

नंबरों को चिह्नित किया जा रहा

अपर पुलिस उपायुक्त अपराध डाॅ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों के नंबरों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके बाद मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाती है। नंबरों को बंद करा दिया जाता है।

1930 पर करें काॅल

साइबर सेल के एक्सपर्ट विजय तोमर ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को नए-नए तरीके अपनाकर झांसे में लेते हैं। बैंककर्मी, कंपनी अधिकारी, बीमा एजेंट, रिश्तेदार बनकर काॅल करते हैं। खाते की जानकारी लेते हैं। इसके बाद रकम निकाल लेते हैं। नौकरी, रिवार्ड पॉइंट आदि के नाम पर भी ठगी कर रहे हैं। इसके लिए रकम खाते में जमा करा लेते हैं। लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। फोन पर किसी अनजान व्यक्ति को निजी और खाते की जानकारी नहीं दें। लालच में नहीं आए। अगर, कोई रकम मांगता है तो समझ जाएं, ठगी होने वाली है। साइबर ठगी होने पर साइबर क्राइम पोर्टल के नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। संबंधित थाने और साइबर सेल को भी अवगत कराएं।

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