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बिजली लाइन प्रतीकात्मक
– फोटो : Social Media
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अलीगढ़ के सांगवान सिटी परिसर में 33 केवी की 1200 मीटर लाइन शिफ्ट करने के मामले में विभागीय जांच में निलंबित जेई लाखन सिंह की भूमिका को संदिग्ध माना है। इस आधार पर नई लाइन की लागत रकम 4.94 लाख 340 की वसूली जेई के वेतन या विभागीय देयकों से करने की संस्तुति की है। इस मामले में सांगवान सिटी प्रबंधन, ठेकेदार व सुपरवाइजर पर महुआखेड़ा में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
बता दें कि 132 केवी बौनेर सबस्टेशन से ताला नगरी औद्योगिक क्षेत्र के लिए 33 केवी की लाइन आ रही है। 23 किलोमीटर लंबी लाइन को 13 नवंबर को शट डाउन लेकर नई लाइन के रूप में बदलवाया गया। यह काम ठेकेदार चक्रपाणी भट्ट द्वारा किया गया। इसी बीच उसी दिन सांगवान सिटी परिसर में 1200 मीटर की 33 केवी की नई लाइन खींच दी गई और पुरानी लाइन हटा दी गई, जबकि नियम के अनुसार इस काम के लिए कम से कम 12 लाख रुपये का एस्टीमेट बनता।
कम से कम तीन दिन के शट डाउन में काम होता और पावर कारपोरेशन के स्टोर से पोल व तार आदि आवंटित होते। तब यह काम होता। मगर चंद घंटों के शट डाउन की आड़ में यह काम हो गया। मामला उजागर होने पर जेई को निलंबित कर दिया गया और बौनेर से तालानगरी की लाइन पर काम करने वाले ठेकेदार, सांगवान सिटी निदेशक व ठेकेदार के सुपरवाइजर पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। साथ में पुरानी लाइन को आनन-फानन बहाल करा दिया गया है।
इस मामले में अधिशासी अभियंता स्तर के दो अधिकारी अमित चौधरी व एके रौहेला को जांच सौंपी गई। इधर, अब विभागीय जांच के आधार पर अधिशासी अभियंता पीके सागर के स्तर से जारी संस्तुति आदेश में कहा गया है कि इस कृत्य के लिए संबंधित जेई की भूमिका संदिग्ध है। इस काम का विभागीय व्यय 4.94 लाख 340 नियत करते हुए उसकी वसूली का आदेश जेई के वेतन या देयकों से करने की संस्तुति की है।
इस संबंध में अवकाश पर होने के कारण ए्रक्सईएन से वार्ता नहीं हो सकी। वहीं अधीक्षण अभियंता अनिल अरोरा बताते हैं कि क्या आदेश हुआ है। इस संबंध में एक्सईएन पीके सागर के अवकाश से लौटने पर ही जानकारी हो सकेगी। उसके बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।
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