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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना किसी ठोस आधार के अपराध से बरी करने के फैसलों के खिलाफ सरकार द्वारा अपील दाखिल करने को न केवल कोर्ट के समय की बर्बादी करार दिया अपितु इसे सरकार पर अनावश्यक बोझ बताया है। कोर्ट ने कहा अधिकारी जवाबदेही से बचने के लिए गैर जरूरी मामलों में भी रूटीन तरीके से काफी देरी से अपील दाखिल करते हैं। जबकि, सरकार के लिए जरूरी नहीं है कि हर केस में अभियुक्त के बरी होने के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल ही करें।
कोर्ट ने इसे निंदनीय मानते हुए सरकार को इस पर विचार करने को कहा है।कोर्ट ने विधि सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि किस परिस्थिति में अभियुक्त के सत्र अदालत से बरी होने के फैसले को अपील में चुनौती देने का निर्णय लिया गया। राज्य की वाद नीति के आलोक में क्या तंत्र विकसित किया गया है।
कोर्ट ने सचिव को फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने की मूल पत्रावली भी पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा वह अपील खारिज कर देती किंतु अपील दाखिल करने में 213 दिन की देरी की जिस तरह से सफाई दी गई है कि मुद्दे पर राज्य सरकार की सफाई जरूरी है। आपराधिक अपील की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
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