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अमर उजाला की 26वीं वर्षगांठ पर सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने साझा किए अपने विचार
– फोटो : अमर उजाला
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Amar Ujala Dehradun 26th foundation: न काहू से दोस्ती न काहू से बैर…पढ़ें अनूप नौटियाल का ये खास लेख
मेरे घर पर हर सुबह हिंदी और अंग्रेजी के राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय 11 अखबार आते हैं। उनमें से सिर्फ एक अखबार ऐसा है जिसे मैं रोज दो बार पढ़ता हूं। सुबह उठते ही इस एक अखबार का ऑनलाइन वर्जन टटोल लेता हूं और जब सब अखबार घर आ जाते हैं तो इसे पूरा पढ़ने का प्रयास करता हूं। वह अखबार सिर्फ और सिर्फ अमर उजाला है।
आज जबकि मीडिया की निष्पक्षता को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, ऐसे समय में किसी अखबार या किसी न्यूज चैनल, पोर्टल के लिए निष्पक्ष बने रहना बड़ी चुनौती है। यह चुनौती इसलिए ज्यादा बड़ी हो जाती है कि जब इस तरह की धारणा बन जाए तो पाठक या दर्शक हर खबर को शंका की नजर से देखने लगते हैं।
ऐसे वातावरण में किसी मीडिया घराने के लिए निष्पक्ष बने रहना और निष्पक्ष दिखना बड़ी कामयाबी कही जा सकती है। अमर उजाला इस मोर्चे पर खरा उतरता है।पत्रकारिता का एक ध्येय वाक्य है न काहू से दोस्ती न काहू से बैर। अमर उजाला अखबार में आज भी पत्रकारिता का यह ध्येय वाक्य उत्तराखंड में जीवित है, मुझे यही महसूस होता है। मैंने नहीं देखा कि अमर उजाला की कोई खबर एकतरफा, किसी एजेंडा या किसी को प्रमोट करने के लिए छापी गई हो या कहीं किसी पेज पर नीचे दबा दी गई हो। उदाहरण के लिए हाल ही का जोशीमठ प्रकरण है।
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