Amar Ujala Samvad: उपराज्यपाल ने कहा- जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराकर ही यहां से जाऊंगा

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Amar Ujala Samvad: lg manoj sinha said he leave only after holding assembly elections in Jammu and Kashmir

अमर उजाला संवाद जम्मू कश्मीर
– फोटो : संवाद

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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराकर ही यहां से जाएंगे। वह लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नहीं जाने वाले हैं। न ही सक्रिय राजनीति के बारे में सोचा है। वह मिला जुला खेल नहीं खेलते हैं। राष्ट्र सेवा का उन्हें सबसे बड़ा काम सौंपा गया है जिसे पूरा करना है। वह वीरवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे।

कार्यक्रम में राइजिंग जम्मू-कश्मीर सत्र में उप राज्यपाल ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर भारी गफलत है। वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सरकारी योजना बनी थी जिसमें 3000 नौकरियां तथा 3000 मकान बनाए जाने थे। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी 3000 नौकरियों तथा 3000 आवास की घोषणा की गई। लेकिन जब वह यहां आए तो 2837 पदों पर नियुक्ति हो पाई थी। 

उन्होंने इसे गति देते हुए 38 पदों को छोड़कर शेष सभी पद भर दिए। यह 38 पद भी कानूनी अड़चन की वजह से नहीं भर पाई हैं। वह जब आए थे तो केवल 700 मकान बने थे। एक रूम का फ्लैट बनना था, लेकिन दो रूम के फ्लैट बना दिए गए। इस वजह से ठेकेदार को भुगतान भी नहीं हुआ और काम रुक गया। 

उन्होंने आने के बाद न केवल ठेकेदार के बकाये का भुगतान किया, बल्कि 6000 आवास के लिए जमीन मुहैया करा दी। इनमें से 3000 मकान बनकर तैयार हो गए। शेष भी एक साल में ही पूरे हो जाएंगे। इससे पुनर्वास नहीं होगा। इससे भी बढ़कर यह प्रयास किया जा रहा है कि केवल कश्मीरी पंडित ही नहीं बल्कि जम्मू में रहने वाले लोग भी कश्मीर में जाकर रहे।

राजनीतिक शून्यता के हालात नहीं, निकाय चुनाव जल्द

जनता व सत्ता के बीच भरोसे की कमी तथा 2019 के बाद राजनीतिक शून्यता जैसे हालात नहीं है। जम्मू कश्मीर के पांच लोग संसद में हैं। पंचायती राज व्यवस्था चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में सबसे देर से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई, लेकिन अब यह देश के किसी भी राज्य से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि निकाय सभी जगह काम कर रहे थे। चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। लेकिन कुछ सांविधानिक अड़चन आ गई। राज्य पुनर्गठन के बाद ओबीसी को आरक्षण का प्रावधान नहीं था, जबकि यह अनिवार्य है। ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था होने के तत्काल बाद चुनाव कराए जाएंगे।

किसी को भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का नैतिक हक नहीं

उन्होंने कहा कि संसद में यह बयान दिया गया था कि पहले परिसीमन, फिर चुनाव और तब राज्य का दर्जा बहाल होगा। परिसीमन का काम पूरा हो गया है, अब चुनाव आयोग को फैसला लेना है। कुछ लोगों को दिन रात सपना आता है और आयोग पर सवाल उठाते हैं। हकीकत जानने के बाद भी वह बार-बार झूठ बोलते हैं। परिसीमन के वक्त परिसीमन आयोग के सामने एसोसिएट सदस्य तथा आम नागरिक की हैसियत से बात रखने का पूरा अधिकार था। भारत संविधान से चलता है। चुनाव आयोग को फैसला लेना है। आयोग जो लोग चला रहे हैं उन्हें लंबा अनुभव है। भारत की न्यायपालिका और चुनाव आयोग सबसे निष्पक्ष मंच है। किसी को यह नैतिक हक नहीं है कि वह चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करे।

देशभर के उद्यमी जम्मू-कश्मीर आएं उद्योग स्थापित करने

उप राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर समेत अन्य पर्वतीय राज्यों में कृषि योग्य भूमि पर केवल वहां के नागरिकों का हक होता है। लेकिन विश्वविद्यालय, अस्पताल, संस्थान, आतिथ्य, उद्योग आदि क्षेत्रों के लिए सरकार भूमि दे रही है। उन्होंने देशभर के उद्यमियों से आग्रह किया कि वे जम्मू कश्मीर आएं और यहां उद्योग स्थापित करे, सरकार पूरी मदद करेगी।

उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर

उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अनेक जड़ता थी, अनेक खड्डे थे और जंजीर थी। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले चार सालों में अंधेरे से निकलकर उज्ज्वल भविष्य की ओर जम्मू कश्मीर अग्रसर हुआ है। जब कोई बीज डालते हैं और वह वृक्ष बनने लगता है तो प्रसन्नता होती है। हर नागरिक की आकांक्षा को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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