Amar Ujala Samvad: पूर्व सैनिकों ने उठाया मुद्दा, बोले- वीरांगनाओं को परिवार चलाने के लिए मिले पूरी पेंशन

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Amar Ujala Samvad Dehradun Soldiers raised issue Said Virangana should get full pension to run family

संवाद में पहुंचे पूर्व सैनिक
– फोटो : amar ujala

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अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को संवाद कार्यक्रम का आयजिन किया गया। जिसमें सेना के जवानों ने पहुंचकर अपनी पीड़ा बताई। करीब 40 मिनट तक इस चले इस कार्यक्रम में कठिनाई और जोखिम सबसे ज्यादा जवाने उठाते हैं तो अधिकारियों को एमएसपी क्यों ज्यादा दी जा रही।

अधिकारी और जवान के अंग का उपयोग एक समान तो डिसेबल भत्ता एक समान क्यों नहीं, वीरांगनाओं को परिवार चलाने लायक पर्याप्त पेंशन क्यों नहीं, वीआरएस वाले 2014 जून तक को ओआरओपी का लाभ दिया जाना जून 2014 के बाद वाले को छोड़ क्यों दिया। कहा कि रिजर्विस्ट सैनिकों का योगदान एक समान फिर भी इन्हें ओआरओपी का लाभ क्यों नहीं, ग्रुप एक्स के पूर्व सैनिकों के पेंशन में कटौती क्या छलावा नहीं है।

सीएसडी में सामान की कीमत सिपाही व आफिसर के लिए सामान तो भेदभाव क्यो, सिपाही और आफिसर को बीमार में दर्द एक सा तो ईसीएचएस द्वारा इलाज में भेदभाव जैसे विभिन्न मुद्दों पर सैनिकों ने खुलकर अपने विचार रखें।

 

समान रैंक समान पेंशन की विसंगतियों का होना चाहिए निवारण

अलम सिंह भड़ोनी ने कहा कि वर्ष 1973 तक जेसीओ और जवानों को बलपूर्वक कम सेवा अवधि व उम्र में रिटायर करने की बाध्यता के कारण उन की पेंशन का निर्धारण वेतन का 75 प्रतिशत हुआ करता था, जिसे घटाकर 50 प्रतिशत करते हुए आश्वासन दिया कि समान रैंक समान पेंशन (ओआरओपी) के माध्यम से इसकी क्षतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी। ओआरओपी जुलाई 2014 से स्वीकृत की, पर इसका सही निर्धारण नहीं होने से जेसीओ, जवानों को नाम मात्र का लाभ मिला और सरकार द्वारा स्वीकृत बजट का बड़ा हिस्सा सेना के तीन प्रतिशत रिटायर्ड अधिकारियों की जेब में चला गया, जो इसके हकदार ही नहीं थे।

अमर उजाला संवाद देहरादून

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