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अमर उजाला संवाद।
– फोटो : amar ujala
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अमर उजाला संवाद के तीसरे सत्र ‘कारोबार में शिखर पर पहुंचने की बात’ में पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट एडिटर मो. आसिफ इकबाल, एलवाइस म्युचअल फंड की एमडी व सीईओ राधिका गुप्ता और लुलु ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर जयकुमार गंगाधरन अपने विचार रखे। इस दौरान पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट एडिटर मो. आसिफ इकबाल ने कहा कि अभी बहुत कुछ करना है देश के लिए। यहां तक आने की यात्रा बहुत ही संघर्षों से भरी रही। मैं भागलपुर में पला-बढ़ा। आज भी मुझे याद है उनकी एक ही परसेप्शन थी कि ये जिंदगी में कभी कुछ नहीं कर पाएगा। माता-पिता फील करते थे कि ये बेचारा समाज पर बोझ जैसा है। पर हमें आज भी याद है जब प्रिंसिपल हमारे पापा और अंकल को बुलाकर कहते थे कि इसे लेकर जाइए, ये पूरा माहौल खराब कर रहा है। शायद मैंने स्वीकार कर लिया था। कई बार फेल किया। ताने सुने फिर मैं अपने ताऊ के साथ जब अमेरिका गया तो वहां शिक्षकों ने मेरा हौसला बढ़ाया और लगातार परिश्रम किया तो उसका फल भी मिला।
एलवाइस म्युचअल फंड की एमडी व सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि हमारे देश में 140 करोड़ उपभोक्ता हैं। अब लोगों की सोच बदल रही है। अब नौकरी करने वाले को माना जाता है कि कुछ कर ही नहीं रहा है। आज का युवा जिस भारत में बड़ा हो रहा है वह मेरे भारत से बहुत अलग है। आज के बच्चे के हाथों में मोबाइल है। आज आठ साल का बच्चा शॉर्क टैंक देखता है। आज के बच्चों के बिजनेस की थिंकिंग पहले की तुलना में बहुत आगे है। आज के युवाओं का आत्मविश्वास भी बहुत ज्यादा है। ऐसे में वे भविष्य में बहुत आगे जा सकते हैं। यूपी और हिंदुस्तान एक बहुत बड़ा कंज्यूमर मार्केट है। यह सबके लिए अच्छी खबर है। आप कोई भी बढ़िया बिजनेस आप कर सकते हैं। आप ग्राहकों की जरूरत को पकड़िए और उसका समाधान पेशकर बिजनेस करिए। लोगों को उपभोक्तओं से संवाद करना चाहिए। आज के हिंदुस्तान में कैपिटल की कमी नहीं है। अगर आइडिया अच्छा है तो पैसे देने वाले मिलेंगे। बिजनेस एक लाइफटाइम का काम है।
इस सत्र में लूलू माल के रीजनल डायरेक्टर जय कुमार गंगाधरन ने कहा कि जब हम यहां पर लूलू मॉल शुरू कर रहे थे तो यही दिमाग में था कि जब शहर में पहले से ही इतने सारे माल है तो इसे लोग कैसे स्वीकार करेंगे पर लोगों का रिस्पांस उत्साह बढ़ाने वाला रहा। उन्होंने बताया कि अब वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर में विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं।
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