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अतीक अहमद
– फोटो : अमर उजाला
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उमेश पाल की हत्या करना माफिया अतीक अहमद और उसके परिवार पर भारी पड़ गया। हर बार घटना को अंजाम देने के बाद माफिया के करीबी और शूटर पुलिस को चकमा देकर संरेंडर कर देते थे, जिससे जेल में जाने के कारण वह बच जाते थे। उमेश पाल की हत्या के बाद भी माफिया ने यही चाल चली थी। उसको उम्मीद थी कि कुछ दिन पुलिस को छकाने के बाद उसके बेटे असद सहित सारे शूटर बारी बारी से सरेंडर कर देंगे और पुलिस की गोली से बच जाएंगे, लेकिन एसटीएफ की सक्रियता के आगे उसके मंसूबों पर पानी फिर गया।
एसटीएफ ने झांसी में उसके बेटे असद और शूटर गुलाम का एनकाउंटर कर दिया। दोनों के ऊपर पांच-पांच लाख का इनाम था। उमेश पाल की हत्या के डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर पुलिस और एसटीएफ पर सवाल उठने लगे थे। लोगों को लगने लगा था कि अब मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। दरअसल अब तक अतीक के कुनबे के किसी भी सदस्य को गिरफ्तार कर पाने में पुलिस सफल नहीं हो पाई थी। अतीक से लेकर उसके बेटों तक, जब जिसने जैसे चाहा, अपने हिसाब से कोर्ट में सरेंडर किया। यह पहला मौका है जब उसके बेटे को पुलिस ने मठभेड़ में ढेर किया है। यह माफिया अतीक को सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
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