दिल्ली में अगर आप मेट्रो में सफर करते हैं और स्टेशन से अंतिम मंजिल तक जाने के लिए ऑटो या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है तो मेट्रो से ज्यादा ऑटो व टैक्सी में जेब ढील करनी पड़ेगी। परिवहन के तीनों साधनों से औसतन पांच किमी की समान दूरी तय करने पर ऑटो में मेट्रो से दोगुना, जबकि टैक्सी में तीन गुुना ज्यादा किराया देना होगा। इसके बाद भी वाया सड़क दिल्ली के ट्रैफिक में तय समय पर अपनी मंजिल तक पहुंचने की गारंटी भी नहीं रहेगी। इस सबके बीच दिल्ली में अब भी सबसे सस्ता सफर बसों का ही साबित होगा।
दिल्ली सरकार की तरफ से ऑटो-टैक्सी किराये में बढ़ोतरी से परिवहन सेवाएं और महंगी होने से यात्रियों के साथ-साथ चालकों पर भी वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा। करीब पांच किलोमीटर के सफर में मेट्रो में 30 रुपये, जबकि ऑटो में 65 और नॉन एसी टैक्सी में 100 रुपये से अधिक किराया लगेगा। अगर डीटीसी या क्लस्टर की सामान्य बस में सफर करते हैं तो 10 रुपये जबकि एसी बसों के लिए इतनी दूरी के सफर पर 15 रुपये खर्च करना पड़ता है। यानी मेट्रो में ढाई से तीन गुना, ऑटो में चार गुना जबकि टैक्सी में छह गुना तक अधिक किराया होगा।
अलग-अलग परिवहन सेवाओं पर खर्च
मेट्रो 5 से 12 किलोमीटर- 30 रुपये
ऑटो में 5 किलोमीटर-65 रुपये
टैक्सी-100 रुपये से अधिक
बस-नॉन एसी-10, एसी-15 रुपये
शुरू से चालक कर रहे हैं सब्सिडी बढ़ाने की मांग, कैब कंपनियों को फायदा
दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा कि चालकों की शुरू से सीएनजी पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग रही है। केवल काली- पीली टैक्सी और ऑटो किराये में बढ़ोतरी से रेलवे और एयरपोर्ट से भी यात्री सफर नहीं करेंगे। उन्हें एप आधारित टैक्सी में कम किराए में सफर का मौका मिलेगा। सरकार ने निजी टैक्सी चालकों के हितों की अनदेखी की है।
चालकों की कमाई पर पड़ेगा असर ऑल दिल्ली ऑटो टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष किशन वर्मा ने किराये में बढ़ोतरी को सरकार की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि एप आधारित कैब कंपनियों के इशारे पर किराये में बढ़ोतरी की गई है। सीएनजी में सब्सिडी बढ़ाने के बजाय किराया बढ़ाए जाने से चालकों की कमाई और कम होगी। कोरोना काल के बाद यात्री पहले कम खर्च करना चाहते हैं। किराया बढ़ने से यात्रियों की संख्या में कमी का असर चालकों की कमाई पर पड़ेगा।
ऑटो किराये में बढ़ोतरी से चालकों को राहत मिलेगी। लेकिन किराये में बढ़ोतरी के साथ मीटर रिवाइज करने पर होने वाले खर्च पर सरकार सब्सिडी दे या कंपनियां निशुल्क करे। एक मीटर में किराये की दरें संशोधित करने पर करीब 600 रुपये का खर्च आता है।
विस्तार
दिल्ली में अगर आप मेट्रो में सफर करते हैं और स्टेशन से अंतिम मंजिल तक जाने के लिए ऑटो या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है तो मेट्रो से ज्यादा ऑटो व टैक्सी में जेब ढील करनी पड़ेगी। परिवहन के तीनों साधनों से औसतन पांच किमी की समान दूरी तय करने पर ऑटो में मेट्रो से दोगुना, जबकि टैक्सी में तीन गुुना ज्यादा किराया देना होगा। इसके बाद भी वाया सड़क दिल्ली के ट्रैफिक में तय समय पर अपनी मंजिल तक पहुंचने की गारंटी भी नहीं रहेगी। इस सबके बीच दिल्ली में अब भी सबसे सस्ता सफर बसों का ही साबित होगा।