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श्रीराम मंदिर आंदोलन में शामिल हुए थे पूर्व मेयर राजकुमार अग्रवाल
– फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 1990 में कारसेवा का आह्वान हुआ तो मैं बरेली का मेयर था। मैंने डॉ. दिनेश जौहरी के साथ अयोध्या जाने की योजना बनाई थी। प्रशासन को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने मेयर पद के दायित्व की वजह से आंदोलन में शामिल न होने की अपील की। खुफिया एजेंसियों के जरिये मेरी निगरानी भी शुरू करा दी गई थी। इसके बाद भी मैं कारसेवा के लक्ष्य से नहीं डिगा। बरेली के पहले मेयर रहे राजकुमार अग्रवाल ने ये बातें कहीं।
उन्होंने बताया कि अय्यूब खां चौराहे पर सभासद व कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। आशंका थी कि अगर कहीं अयोध्या जाने की सूचना लीक हुई तो उनकी गिरफ्तारी हो जाएगी। मंथन के बाद हम सभी रात में डॉ. मित्तल के घर ठहरे थे। सुबह अयोध्या के लिए रवाना हुए तो पुलिस ने गिरफ्तार कर सभी को शाहजहांपुर जेल में डाल दिया।
जेलर को जब पता चला कि मैं बरेली का मेयर हूं तो उसने प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्थाएं कीं, लेकिन बाहर नहीं जाने दिया। मेरे साथ तीन दोस्तों को भी जुवेनाइल जेल में 15 दिन बंद रखा गया था। वहां राजस्थान के भी 70 लोग बंद थे। कई अन्य जिलों के लोग भी आरएफसी गोदाम में बंद थे। सभी के लिए मिठाई और फल पहुंचता था। वितरण की जिम्मेदारी मुझे मिली थी। हम सब दिन भर श्रीराम जी का भजन करते थे। राजस्थान के जो लोग बंद थे, वे बेहद सुमधुर कीर्तन करते थे।
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