Ayush Colleges: आयुष कॉलेजों में नए सत्र के दाखिले की तैयारी शुरू, प्रबंधकों को सभी तैयारी पूरी करने के दिए निर्देश

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Planning started for admissions in Ayush colleges.

– फोटो : Social Media

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उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस की दो चरण की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद आयुष कॉलेज भी दाखिले की तैयारी में जुट गए हैं। आयुष विभाग ने सभी कॉलेजों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को नए सत्र की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। यह भी कहा गया है कि जहां केंद्रीय टीम ने व्यवस्था को लेकर आपत्ति लगाई है, उसे जल्द दूर किया जाए।

हालांकि आयुष कॉलेजों में दाखिले में हुई हेराफेरी के बाद विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। अभी तक काउंसिलिंग कमेटी और एजेंसी तय नहीं हुई है। केंद्रीय टीम के निरीक्षण में सरकारी व निजी कॉलेजों में कहीं अध्यापकों की कमी पाई गई है तो कहीं लैब का अभाव है। ऐसे में तमाम कॉलेजों की मान्यता फंस गई है।

विभाग ने सभी कॉलेज प्रबंधनों को निर्देश दिया है कि जहां अब तक केंद्रीय टीम का निरीक्षण नहीं हुआ है, वहां निरीक्षण कराने की व्यवस्था की जाए। वहीं, जहां निरीक्षण के बाद खामियां मिली हैं, उसे जल्द से जल्द दुरुस्त कर दोबारा मान्यता के लिए अपील की जाए। अगर दूसरी बार के निरीक्षण में व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं तो मान्यता बहाल हो जाएगी। विभाग का प्रयास है कि काउंसिलिंग शुरू होने तक कॉलेजों की मान्यता का मामला निपट जाए। क्योंकि कॉलेजों की मान्यता फंसे होने पर वहां की सीटें कम करके काउंसिलिंग कराई जाएगी। 

अभी तक कितनी हैं सीटें
प्रदेश में अभी तक बीएएमएस (आयुर्वेद) में सरकारी क्षेत्र के 12 कॉलेजों में 502 और निजी क्षेत्र के 58 कॉलेजों में 5010 सीटें हैं। बीएचएमएस (होम्योपैथिक) की सरकारी क्षेत्र के नौ कॉलेजों में 828 और निजी क्षेत्र के चार कॉलेजों में 200 सीटें हैं। इसी तरह बीयूएमएस (यूनानी) की सरकारी क्षेत्र के दो कॉलेजों में 128 और निजी क्षेत्र के 18 कॉलेजों में 670 सीटें हैं। 

विस्तार

उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस की दो चरण की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद आयुष कॉलेज भी दाखिले की तैयारी में जुट गए हैं। आयुष विभाग ने सभी कॉलेजों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को नए सत्र की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। यह भी कहा गया है कि जहां केंद्रीय टीम ने व्यवस्था को लेकर आपत्ति लगाई है, उसे जल्द दूर किया जाए।

हालांकि आयुष कॉलेजों में दाखिले में हुई हेराफेरी के बाद विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। अभी तक काउंसिलिंग कमेटी और एजेंसी तय नहीं हुई है। केंद्रीय टीम के निरीक्षण में सरकारी व निजी कॉलेजों में कहीं अध्यापकों की कमी पाई गई है तो कहीं लैब का अभाव है। ऐसे में तमाम कॉलेजों की मान्यता फंस गई है।

विभाग ने सभी कॉलेज प्रबंधनों को निर्देश दिया है कि जहां अब तक केंद्रीय टीम का निरीक्षण नहीं हुआ है, वहां निरीक्षण कराने की व्यवस्था की जाए। वहीं, जहां निरीक्षण के बाद खामियां मिली हैं, उसे जल्द से जल्द दुरुस्त कर दोबारा मान्यता के लिए अपील की जाए। अगर दूसरी बार के निरीक्षण में व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं तो मान्यता बहाल हो जाएगी। विभाग का प्रयास है कि काउंसिलिंग शुरू होने तक कॉलेजों की मान्यता का मामला निपट जाए। क्योंकि कॉलेजों की मान्यता फंसे होने पर वहां की सीटें कम करके काउंसिलिंग कराई जाएगी। 

अभी तक कितनी हैं सीटें

प्रदेश में अभी तक बीएएमएस (आयुर्वेद) में सरकारी क्षेत्र के 12 कॉलेजों में 502 और निजी क्षेत्र के 58 कॉलेजों में 5010 सीटें हैं। बीएचएमएस (होम्योपैथिक) की सरकारी क्षेत्र के नौ कॉलेजों में 828 और निजी क्षेत्र के चार कॉलेजों में 200 सीटें हैं। इसी तरह बीयूएमएस (यूनानी) की सरकारी क्षेत्र के दो कॉलेजों में 128 और निजी क्षेत्र के 18 कॉलेजों में 670 सीटें हैं। 



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