Bareilly: मां की प्रेरणा से रंधावा बने पॉप सिंगर, बोले- बहुत खूबसूरत है संगीत की दुनिया, जो सीखा है उसे बढ़ाऊंगा आगे

[ad_1]

पंजाबी सिंगर रंजीत रंधावा

पंजाबी सिंगर रंजीत रंधावा
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

मां की प्रेरणा से पॉप सिंगर बने रंजीत रंधावा का मानना है कि संगीत की दुनिया बहुत खूबसूरत है। जो रस संगीत में है, और कहीं नहीं। संगीत दिल को दिल से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम भी है। वह चाहते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, उसे आगे बढ़ाएं।
 
प्रसिद्ध पॉप सिंगर रंजीत रंधावा रविवार को पंजाबी महासभा के लोहड़ी कार्यक्रम में प्रस्तुति देने शहर आए थे। अमर उजाला के साथ उन्होंने अपने संगीत के सफर को साझा किया। बताया कि गायकी की शुरुआत स्कूल के कार्यक्रमों से हुई। मां बलवंत कौर ने इसके लिए प्रोत्साहित किया। वह कहती थीं कि अच्छा गाओ या खराब, लोग तारीफ करें या आलोचना, पुरस्कार मिले या न मिले, बस गाते रहो। दरअसल, वह गुरुद्वारे में कीर्तन गाती थीं। वह उन्हें अच्छा लगता था। इसलिए मुझे भी प्रेरित किया करती थीं।

दिलावर सिंह से सीखी गायकी 

गायक रंजीत ने बताया कि वह अलवर राजस्थान के रहने वाले हैं। स्नातक करने के बाद दिल्ली आ गए। वहां प्रसिद्ध पॉप सिंगर दिलावर सिंह से गायकी सीखी। 12 साल तक उनके साथ ही रहे। फिर गुरु जी ने उन्हें स्वतंत्र रूप से गाने की इजाजत दी। पांच साल पहले अपना बैंड तैयार कर स्टेज शो शुरू किया। 

उन्होंने बताया कि उनके दो ऐसे हिट सांग हैं जिन्हें लोग हर शो में सुनना चाहते हैं और उन्हें खुद भी पसंद हैं। सुन ले रकान, दारू की दुकान..बच के रे मुंडया तो पी ना कित्ते जाण.. और दूसरा- मुंडा लव करे शहनाज गिल नू..। आखिरी सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर सिंगर नहीं बनता तो विदेश में नौकरी कर रहा होता। 

नहीं भूल सकते वो भावुक पल…

पॉप सिंगर रंजीत ने बताया कि 2020 में नए साल पर उन्होंने अंबाला में प्रस्तुति दी थी। लोगों ने उसे इतना पंसद किया कि आधे घंटे तक भीड़ उन्हें कंधे पर बैठा कर घुमाती रही। उस शो में परिवार के लोग भी मौजूद थे। उस समय हम सभी भावुक हो गए थे। उन पलों को मैं कभी नहीं भूल सकता। लोगों के प्यार और आशीर्वाद से पांच वर्षों में उनके पांच एलबम भी लॉन्च हो चुके हैं, जिन्हें लोगों ने पसंद भी किया है।

विस्तार

मां की प्रेरणा से पॉप सिंगर बने रंजीत रंधावा का मानना है कि संगीत की दुनिया बहुत खूबसूरत है। जो रस संगीत में है, और कहीं नहीं। संगीत दिल को दिल से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम भी है। वह चाहते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, उसे आगे बढ़ाएं।

 

प्रसिद्ध पॉप सिंगर रंजीत रंधावा रविवार को पंजाबी महासभा के लोहड़ी कार्यक्रम में प्रस्तुति देने शहर आए थे। अमर उजाला के साथ उन्होंने अपने संगीत के सफर को साझा किया। बताया कि गायकी की शुरुआत स्कूल के कार्यक्रमों से हुई। मां बलवंत कौर ने इसके लिए प्रोत्साहित किया। वह कहती थीं कि अच्छा गाओ या खराब, लोग तारीफ करें या आलोचना, पुरस्कार मिले या न मिले, बस गाते रहो। दरअसल, वह गुरुद्वारे में कीर्तन गाती थीं। वह उन्हें अच्छा लगता था। इसलिए मुझे भी प्रेरित किया करती थीं।

दिलावर सिंह से सीखी गायकी 

गायक रंजीत ने बताया कि वह अलवर राजस्थान के रहने वाले हैं। स्नातक करने के बाद दिल्ली आ गए। वहां प्रसिद्ध पॉप सिंगर दिलावर सिंह से गायकी सीखी। 12 साल तक उनके साथ ही रहे। फिर गुरु जी ने उन्हें स्वतंत्र रूप से गाने की इजाजत दी। पांच साल पहले अपना बैंड तैयार कर स्टेज शो शुरू किया। 



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *