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मुख्य आरोपी सुरेश प्रधान मूल रूप से रायपुर हंस का निवासी है। गोविंदपुर गांव भी इस गांव से सटे रामगंगा की तलहटी में है। बाढ़ के दिनों में रामगंगा नदी जब कटान करती है तो कटरी की जमीनों का भूगोल बदल जाता है। तब यहां दबंगों का कानून चलता है। सुरेश ने भी इसी तरह कटरी में बेहिसाब जमीन कब्जाई थी। इसमें गैंगवार हुई तो हत्या, जानलेवा हमला, रंगदारी समेत करीब 20 से ज्यादा मुकदमे सुरेश पर दर्ज हुए।
सुरेश को फरीदपुर थाने का सक्रिय हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया तो करीब 20 साल पहले उसने बदायूं जिले का रुख कर लिया। यहां उसके गुर्गे जमीनों का काम देखते रहे। सुरेश के प्रभाव से बेटा सुरजीत तोमर रायपुर हंस का प्रधान भी बना।
वहीं, सुरेश ने वर्ष 2012 में बिल्सी विधानसभा क्षेत्र से महान दल से चुनाव लड़ा और 23 हजार वोट हासिल लिए। सुरेश प्रधान के सोशल मीडिया अकाउंट पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव व दूसरे दलों के अन्य प्रभावशाली नेताओं के साथ करीबी दिखाते हुए फोटो व वीडियो हैं।
तीन साल पहले चंडीगढ़ से सरदार परमवीर सिंह ने गोविंदपुर व आसपास इलाके में जमीन खरीदकर झाला बनाया। यहां करीब एक हजार बीघा जमीन पर खेती हो रही है। इसमें करीब पांच सौ बीघा जमीन परमवीर पक्ष अपनी बताता है।
दो सौ बीघा जमीन सरकारी बताई जा रही है और तीन सौ बीघा जमीन को सुरेश पक्ष अपनी बताता है। परमवीर के कटरी में पैर पसारने को सुरेश की सत्ता के लिए चुनौती माना जा रहा था। इलाके में अपना असर कम न हो, इसलिए सुरेश फिर सक्रिय हो गया था। उसने आधा दर्जन से ज्यादा केस भी परमवीर पक्ष पर दर्ज करा दिए थे।
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