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कमंडल से धरती पर गिरने वाले जल से पृथ्वी पर कंपन शुरू हो गया. कंपन होने के बाद एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई, इस देवी के एक हाथ में वीणा और दुसरे हाथ में वर मुद्रा होती है बाकी अन्य हाथ में पुस्तक और माला थी. ब्रह्मा जी उस स्त्री से वीणा बजाने का अनुरोध किया. देवी के वीणा बजाने से संसार के सभी जीव-जंतुओ को वाणी प्राप्त हुई, इसके बाद से देवी को ‘सरस्वती’ कहा गया. इस देवी ने वाणी के साथ-साथ विद्या और बुद्धि भी दी. बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है.
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