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बीएचयू में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत में जल्द ही यूरोपीय देश एस्टोनिया की तरह जीनोम बैंक खोलने की तैयारी है। इसमें बीएचयू बड़ी भूमिका निभाएगा। इसके जरिये बीमारियों की पहचान में आसानी होगी। व्यक्ति के जीन के हिसाब से दवाओं की डोज निर्धारित की जा सकेगी। कुछ रोछों की जानकारी पहले ही मिल जाएगी। अनुवांशिक बीमारियों की पहचान भी संभव है।
बीएचयू में एसोसिएशन ऑफ डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड एसोसिएटेड टेक्नोलॉजिज (एडनैट) की तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन रविवार को हुआ। संयोजक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि भारत में जीनोम बैंक की शुरुआत हो सकती है। बीएचयू एस्टोनिया देश की तरह जीनोम बैंक बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
एक ही क्लिक पर पूरी मेडिकल हिस्ट्री
इसके जरिये हर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री का ब्योरा एक ही क्लिक पर डॉक्टरों के सामने होगा। विवाह के दौरान ही आने वाली पीढि़यों में होने वाले रोगों के बारे में आगाह किया जा सकेगा। बैंक तैयार करने में लंबा वक्त लगेगा। संयोजक ने कहा कि एडनैट में इसकी आधारशिला रखी जा चुकी है। सरकार से हरी झंडी मिलते ही बीएचयू में काम शुरू कर दिया जाएगा।
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