[ad_1]

इलाजरत नवजात
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गया जिले में एक झोलाछाप चिकित्सक ने महज कुछ पैसों के कारण एक नवजात शिशु को अपंग बना दिया। डेल्हा थाना क्षेत्र के खरखुरा बैरागी देवी स्थान लोको गेट निवासी रविंद्र शर्मा की पत्नी सरिता कुमारी को प्रसव पीड़ा के बाद 22 अक्तूबर की अहले सुबह चार बजे गया के जयप्रकाश नारायण अस्पताल में ले जाया गया। वहां उसकी स्थिति देखने के बाद मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे एएनएमएमसीएच ले जाने की सलाह दी। लेकिन, साथ में आई आशा कार्यकर्ता पिंकी कुमारी उक्त महिला मरीज को बहला-फुसलाकर अस्पताल के समीप स्थित डॉ. मंजू सिंह नामक फर्जी झोलाछाप चिकित्सक के यहां लेकर चली गई। फर्जी चिकित्सक ने महिला के पति से इलाज के नाम पर 15 हजार रुपए से अधिक वसूल लिए। लेकिन, जानकारी के अभाव में जबरदस्ती गर्भ से बच्चे को निकालने की कोशिश में बच्चे के बाएं हाथ की हड्डी कई जगहों से टूट गई। मामले को बिगड़ता देख अस्पताल के कर्मियों ने प्रसूता और बच्चे को वहां से दूसरे अस्पताल भेज दिया। महिला का पति अस्पताल से जांच सहित अन्य कागजातों की मांग करता रहा, लेकिन उसे कोई भी कागज उपलब्ध नहीं कराया गया।
जेपीएन अस्पताल के कर्मी भी संदेह के घेरे में
महिला को प्रसव पीड़ा में जेपीएन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके रजिस्ट्रेशन के बाद उसकी जांच की गई। लेकिन, आश्चर्य की बात है कि अस्पताल के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड के अलावा अन्य किसी भी रजिस्टर पर महिला के वहां आने की कोई बात लिखित में नहीं मिली, जबकि अस्पताल में प्रसव पीड़ा से आने वाली महिला की जांच वहां ड्यूटी पर तैनात नर्स द्वारा की गई और उसकी रिपोर्ट पर रजिस्ट्रेशन स्लिप पर अंकित की गई है।
आवेदन के बावजूद पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई
मामले को लेकर पीड़ित रविंद्र शर्मा ने कोतवाली थाना में आवेदन देकर अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। लेकिन, आवेदन दिए जाने के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। दूसरी ओर उक्त चिकित्सक व कई अन्य लोगों के द्वारा रविंद्र शर्मा को फोन पर लगातार धमकी दी जा रही है। ताकि वह किसी प्रकार से डरकर मामले को वापस ले ले।
सीएस ने कहा – की जाएगी कार्रवाई
इस संबंध में गया के सिविल सर्जन डॉ. रंजन कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से महिला मरीज के आने की पुष्टि हुई है। बाद में अन्य रजिस्टरों में इसका जिक्र क्यों नहीं है। आशा कार्यकर्ता किस स्थिति में महिला को अपने साथ निजी अस्पताल में लेकर गई। इस पूरे मामले के जांच के निर्देश दिए गए हैं। उक्त नर्सिंग होम के जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। दोषी कोई भी हो। किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
[ad_2]
Source link