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आईआईएम बोध गया
– फोटो : अमर उजाला
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बिहार के गया के बोधगया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल 20 फरवरी यानी मंगलवार को 73 एकड़ में बने आईआईएम संस्थान के भवन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेता मौजूद रहेंगे। इसकी जानकारी आईआईएम के पीआरओ सेल द्वारा दी गई है।
बोधगया में मगध विश्वविद्यालय परिसर में आईआईएम संस्थान की स्थापना 31 अगस्त 2015 को हुई थी। दावा किया जा रहा है कि इन वर्षों में बोधगया आईआईएम नई ऊंचाइयों को छुआ। कोविड-19 के चुनौतियों के बीच कंपनियों ने आईआईएम बोधगया के छात्रों पर भरोसा किया है। यहां के संस्थान में छात्रों का 100 परसेंट प्लेसमेंट हुआ है। शोध के लिए इस संस्थान का अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के साथ टाइ-अप है। कई प्रतिष्ठान कंपनियां छात्रों का कैंपस सेलेक्शन कर चुकी हैं।
दरअसल, आईआईएम बोधगया की विशेषता फाइनेंस, मार्केटिंग और एचआर मैनेजमेंट है। इसके अलावा यहां ऑपरेशन, इकोनॉमिक्स, पब्लिक पॉलिसी और ऑर्गेनाईजेशन बिहेवियर में भी पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट की पढ़ाई होती है। बोधगया संस्थान में प्रबंधन कौशल के लिए कई एजुकेशन प्लान द्वारा प्रशिक्षण देने की सुविधा है।
संस्थान के पीआरओ ने बताया कि 2015 में भारत के शिक्षा मंत्रालय के तहत स्थापित, आईआईएम बोधगया 30 छात्रों के अपने उद्घाटन बैच से 293 शहरों और 26 राज्यों के 1,110 से अधिक छात्रों के नामांकन तक विकसित हुआ है। संस्थान ने शैक्षणिक उत्कृष्टता और समावेशी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखी है, जिसमें छात्र समूह में 31.7 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल हैं। परिसर में भविष्य में प्रदान की जाने वाली उत्तम और अत्याधुनिक शिक्षा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई अत्याधुनिक स्मार्ट कक्षाएं हैं। ‘प्रज्ञता’ लाइब्रेरी ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थित होकर छात्रों के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के माध्यम से विशाल संसाधनों का प्रबंधन करती है।
वहीं, शैक्षणिक सुविधाओं के अलावा, परिसर में छात्रों के उत्साहपूर्ण और जीवंत अनुभव में योगदान देता हुआ अत्याधुनिक जिम सुविधाओं और बैडमिंटन, बास्केटबॉल, फुटबॉल और क्रिकेट के प्रावधानों के साथ एक खेल परिसर भी शामिल है। वहीं, छात्रावास बाजरा-आधारित व्यंजनों पर ध्यान देने के साथ स्वस्थ जीवन पर जोर देता है। इसके अलावा, परिसर एक चिकित्सा केंद्र और फैकल्टी और स्टाफ के आवासों के लिए समर्पित चार इमारतों से सुसज्जित है।
आईआईएम बोधगया, मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपी), और कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (सीएसआर) जैसी गतिविधियों के माध्यम से समाज पर एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। संस्थान ने आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य का समर्थन करते हुए 3,000 से अधिक सूक्ष्म उद्यमियों को प्रशिक्षित किया है।
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