Bihar: बाइक से 12 ज्योर्तिलिंग घूम आया, पिता को दो तीर्थ कराया… मगर, महादेव को मंजूर था लखीसराय में तांडव

[ad_1]

Bihar News : mind did not calm down even after visiting 12 jyotirlinga by bike, Lakhisarai open firing

आरोपी प्रेमी के साथ दुर्गा कुमारी
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


दुनिया के कई देशों में ओपन फायरिंग की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन बिहार में बेगूसराय के लंबे अरसे बाद लखीसराय में सोमवार को ऐसी घटना सामने आयी थी। उस घटना में दो भाइयों और उनकी बहन की मौत के बाद मंगलवार को दिनभर प्रदर्शन और बाजार बंद का दौर रहा। लेकिन, इन सभी के बीच पुलिस ने घटना के लाइनर और 9 एमएम पिस्टल उपलब्ध कराने वाले दो लोगों को दबोचकर संवाददाता सम्मेलन किया। इसमें सबसे ज्यादा चर्चित हत्यारे की डायरी है, जिसमें उसने हत्या की वजह बताई है। वजह ‘अमर उजाला’ अपनी पहले की दो खबरों में सामने ला चुका है। हम कतई उस हत्यारे को सही नहीं बता रहे, लेकिन उसकी डायरी के पन्नों में समाज के लिए जो चेतावनी है, उसे जानना चाहिए।

बकौल डायरी- चेतावनी 1. धोखे की चोट खाकर शांति की खोज में गया

अपने से ऊंची जाति की लड़की के प्रेम में पड़ा। फिर, समाज से दूर चुपके से शादी रचाई। फिर पता चला कि अपनी प्रेमिका के जीवन में वह पहला नहीं, दूसरा है। फिर मान-मनौव्वल के बाद सबकुछ ठीक होता दिखा कि पता चला कि कोई तीसरा भी है, जिसके कारण उसका प्रेम दम तोड़ रहा है।… आशीष चौधरी उर्फ छोटू की डायरी में इन बातों के साथ जो लिखा है- वह ज्यादा सोचने लायक बात है। बात यह कि आशीष को जब धोखे का एहसास हुआ तो वह खुद को टूटता देख 12 ज्योर्तिलिंग की यात्रा पर निकला। इसमें भी पहले एक दोस्त ने धोखा दिया, तो अकेले निकल गया। अपने बिहार से निकल 17 राज्यों की यात्रा की। द्वादश ज्योर्तिलिंग की यात्रा के दौरान भी चाह रहा था कि उधर ही कहीं उसकी जान चली जाए। नहीं हुआ तो नेपाल में पशुपतिनाथ भी गया। फिर भी शांति नहीं मिली तो पिता को अयोध्या और गंगासागर का तीर्थ करा आया। डायरी के अनुसार यह सब उसने धोखे को भूल नई जिंदगी के प्रयास में किया, लेकिन साथ ही लिखा कि इतनी यात्राओं से भी शांति नहीं मिली। कोई रास्ता नहीं सूझा। पिछले दिनों लखीसराय के अशोक धाम में भी गया। आशीष की डायरी के अनुसार इतना कुछ करने पर एक चीज मांगा। वह क्या है, इस बारे में डायरी में नहीं लिखा है। फिर आगे लिखा है कि कुछ मांगा है, वह नहीं मिला तो समझ गया कि बला नहीं टलेगी। महादेव को यह पसंद नहीं। हमारी मृत्यु तय है तो तांडव भी। फिर 20 नवंबर को छठ घाट से लौटते प्रेमिका के पूरे परिवार पर ओपन फायरिंग की हकीकत सामने आयी, जिसमें अबतक तीन की जान जा चुकी है।

बकौल डायरी- चेतावनी 2. अकेलापन का भी जिक्र बार-बार किया

आशीष ने धोखे का जिक्र किया तो अपने परिवार और दोस्ती में भी अकेला पड़ने की जानकारी दी। डायरी की कितनी बातें सही और कितनी मनगढ़ंत हैं, इसपर कुछ कहना गलत होगा, लेकिन लिखी गई बातों से अकेलापन साफ झलकता है। मनोवैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार कहते हैं कि “आरोपी आशीष ने कहीं लिखा है कि वह अपनी मां के जाने के बाद अकेला पड़ गया। बाकी भाई-बहन अपनी जिंदगी में व्यस्त थे। दोस्त ने भी मौके पर मदद नहीं की, साथ यात्रा नहीं की बल्कि धोखा दे दिया। वैसे भी डायरी की शुरुआत ही आशीष ने अपने सभी रिश्तेदारों-दोस्तों से खुद को अलग करते हुए की, जो एक तरह से चेतावनी है कि समाज को ऐसे मामलों में निगरानी करनी चाहिए, परिवार को बाद में पछताने की जगह पहले ही चेत जाना चाहिए। किसी को ऐसे अकेला छोड़ा जाएगा तो वह गलत रास्ता अख्तियार कर सकता है।”

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *