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अपने पति के साथ पीड़िता
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार के समस्तीपुर जिले के वैनी ओपी क्षेत्र में करीब 18 महीने पूर्व सत्संग सुनने गई विवाहित से एक अधेड़ ने दुष्कर्म किया था। थाने से लेकर वरीय अधिकारी के यहां चक्कर लगाने के बाद भी मामले में प्राथमिकी नहीं हुई। बाद में करीब 11 महीने बाद राज्यपाल के आदेश पर वैनी ओपी में मामला दर्ज किया गया, जिसमें सत्संग संचालक नगीना प्रसाद सिंह को आरोपी बनाया गया। लेकिन इस मामले में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। तंग आकर पीड़ित परिवार ने अब प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाई है। इस पूरे मामले पर पीएमओ ने जिला पुलिस ने रिपोर्ट तलब की है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, जिले के ताजपुर थाना क्षेत्र निवासी एक विवाहिता वैनी ओपी क्षेत्र में 15 मई 2022 को परिवार के लोगों के साथ सत्संग में शामिल होने के लिए गई थी। परिवार के लोग पुरुष वाली पंक्ति में और विवाहिता महिला वाली पंक्ति में बैठ गए। विवाहिता का आरोप है कि कुछ देर बाद सत्संग संचालक नगीना प्रसाद ने उसे इशारे से बुलाया हैं। विवाहिता कोई कार्य समझ उसके पास चली गई, जिसके बाद उसे वह पास के ही अपने मकान के कमरे में ले गया। जहां उससे बलात्कार किया गया। विवाहिता के शोर मचाने पर उसके पति और परिवार के लोग मौके पर पहुंचे।
आरोप है कि इसी बीच विवाहिता को कमरे में बंद कर मारपीट की गई, यहां तक कि उसे जहर भी दे दिया गया। इस दौरान बाहर जुटे लोग उसके पति और परिवार के लोगों के साथ भी मारपीट करते रहे। जब भीड़ जुट गई तो लोग उसे थाने ले गए। लेकिन थाने में तैनात पुलिस पदाधिकारियों ने पहले इलाज कराने की बात कही। जब पीड़िता की स्थिति में सुधार हुआ तो वह प्राथमिकी के लिए थाने पहुंची, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया।
11 महीने बाद इस तरह दर्ज हुआ मामला
प्राथमिकी न होने पर दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार राज्यपाल के यहां पहुंचा। उसके बाद करीब 11 महीने बाद 20 अप्रैल 2023 इस मामले में वैनी ओपी में नगीना प्रसाद समेत 11 लोगों पर मामला दर्ज किया गया। लेकिन मामले में अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। इसलिए पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।
सबूत के अभाव में हटाई गई दुष्कर्म की धारा
वैनी ओपी अध्यक्ष मो. तारिक अनवर ने कहा कि वरीय पदाधिकारी के आदेश पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसके बाद कोर्ट के आदेश पर मेडिकल जांच के लिए पीड़िता को कहा गया तो पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया। पीड़िता का कहना था कि घटना 11 महीना पहले की है। ऐसी स्थिति में अब दुष्कर्म का कोई साक्ष्य नहीं मिलेगा। हालांकि पीड़िता ने कोर्ट में 164 के बयान में दुष्कर्म की बात बताई है। मेडिकल जांच न होने के कारण बलात्कार की पुष्टि नहीं हो पाई। नतीजन इस मामले में रेप की धारा 376 को हटाकर चार्जशीट दाखिल किया गया है। मामला अब कोर्ट को देखना है। कोर्ट का आदेश होने पर इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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