Bihar: सीतामढ़ी में हजारों शिक्षकों ने निकाला मशाल जुलूस; सरकार से सक्षमता परीक्षा को वापस लेने की मांग

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Teachers took out a torch procession in Sitamarhi and demanded Bihar govt to withdraw competency test

सक्षमता परीक्षा के खिलाफ मशाल जुलूस निकालते नियोजित शिक्षक
– फोटो : अमर उजाला

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बिहार के सीतामढ़ी में सक्षमता परीक्षा के विरोध में शुक्रवार की शाम नियोजित शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एसीएस केके पाठक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। वहीं, शिक्षकों ने सक्षमता परीक्षा को खत्म कर राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग की है। उक्त मशाल जुलूस डुमरा हवाई फील्ड से निकलकर जिला मुख्यालय, बड़ी बाजार, शंकर चौक होते हुए वापस हवाई फील्ड में आकर खत्म हुआ।

जानकारी के मुताबिक, मशाल जुलूस में हजारों की संख्या में नियोजित शिक्षक व शिक्षिकाएं शामिल हुए। जुलूस में शामिल हुए नियोजित शिक्षकों ने कहा कि हमारी मांगें सरकार अविलंब पूरा करे और हमारे ही जिले में हमें रखे जाने का प्रावधान लागू करे। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने कहा कि बिहार में नियोजित शिक्षकों के साथ ठीक नहीं हो रहा है। नियोजित शिक्षकों को लेकर जिसको जब जैसा मन कर रहा है, वैसा नियम बना दे रहा है। इसकी वजह से शिक्षक आक्रोशित हैं। वहीं, उन्होंने आगे कहा कि तीन बार परीक्षा में असफल रहने वाले शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी जाएगी। इस फैसले से शिक्षकों में आक्रोश है।

मशाल जुलूस में शामिल शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग के इस फैसले कहा कि शिक्षक नियोजन नियमावली के अनुसार 60 वर्ष की उम्र तक नियोजित शिक्षकों के नौकरी में बने रहने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि यह घोर निंदनीय फैसला है। यह शिक्षक नियोजन नियमावली के विपरीत आदेश है। इस फैसले को शिक्षक चुनौती देंगे। नियोजित शिक्षकों को अलग-अलग फैसलों के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि हर हाल में सरकार को यह फैसला वापस लेना होगा, नहीं तो शिक्षक इससे भी बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

गौरतलब है कि नियोजित शिक्षक के लिए पहली सक्षमता परीक्षा 26 फरवरी से आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा में पास होने के लिए तीन मौके दिए जाएंगे। 26 फरवरी को होनी वाली पहली सक्षमता परीक्षा और उसका परिणाम घोषित करने के बाद तीन चरणों में लगातार परीक्षाएं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा ली जाएंगी। जो शिक्षक इन चारों चरण में होने वाली परीक्षाओं में से तीन चरणों की परीक्षा में नहीं बैठते हैं या फिर तीन से कम चरणों में बैठते हैं या तीन चरणों की परीक्षा में बैठने के बाद पास नहीं होते हैं तो उन सभी स्थानीय निकाय शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

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